चंदौली। पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने अपने गढ़ में बीजेपी की खेमाबंदी को सधी रणनीति से तार-तार कर दिया। नियामताबाद ब्लाक में प्रमुख की कुर्सी हासिल करने के खेल को महज एक वोट के बूते विफल करते हुए अपने राजनैतिक कौशल का परिचय दिया। नतीजा, बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग की नौबत ही नहीं आयी और महेन्द्र पासवान की कुर्सी बरकरार रही। भाजपा की सरकार बनने के बाद से प्रमुखी के लिए खम ठोंक रहे उमाशंकर का पूरा सहयोग सत्ताधारी दल कर रहा था लेकिन अब खीज मिटाने की खातिर सफाई दी जा रही है कि पार्टी का समूचे मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

जितनों की कराई थी परेड वह भी नहीं पहुंचे

गौरतलब है कि उमाशंकर ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए एक माह पूर्व 86 बीडीसी के हलफनामे के साथ लगभग 82 लोगों की परेड कराकर डीएम को विश्वास दिलाया था कि महेंद्र पासवान अपना विश्वास खो चुके हैं। डीएम ने भी निकाय चुनाव के बाद मतदान की तिथि तय की थी। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सभी 141 बीडीसी को नोटिस भेजा गया था। बावजूद इसके उमाशंकर अपने सभी सदस्यों को संभालने में विफल रहे जिससे अविश्वास प्रस्ताव पर वोट देने की खातिर वांछित वीडीसी नहीं जुट सके। प्रमुख को हटाने के लिए 71 वोट चाहिये थे लेकिन जुट सके 70 ही। रणनीति फेल होते देख उमाशंकर ने कार्रवाई का विरोध किया और अपने समर्थक लेकर बाहर निकल आए जिससे न तो चर्चा हुई और न ही मतदान हो सका।

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