वाराणसी। रेखा शर्मा पिछले दो कार्यकाल से रामनगर पालिका की चेयरमैन के रूप में आसीन रही है और कार्यकाल में किसी की विरोध अधिक समय नहीं झेला। तीसरी बार उन्हें कुर्सी भले मिल गयी हो लेकिन इस बार कांटो का ताज सरीखा सफर दिख रहा है। कैैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव के साथ ‘समझौते’ की अटकलों के बीच पिछले शनिवार को जो संकेत मिले थे उस पर विराम लग गया है। बोर्ड की शुक्रवार को हुई बैठक में विधायक के नहीं पहुंचने से सभासद नये सिरे से लामबंद हो रहे हैं। कुल मिला कर जो परिदृश्य दिख रहा है उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि इस बार रेखा शर्मा की राह आसान नहीं है और पग-पग पर चुनौतियों का सामना करना होगा

पहली बैठस से शुरू हुआ है विवाद

रामनगर बोर्ड की पिछले शनिवार को हुई प्रथम बैठक बेनतीजा रहने के बाद नगरपालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के कार्यशैली से नाराज लगभग 17 सभासदों ने नगरपालिका परिसर में 50 घंटे तक धरना प्रदर्शन किया था। इसके बाद कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव और सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. विश्राम ने सभासदों को समझाकर धरना समाप्त कराया था इस दौरान विधायक ने ही बोर्ड के बैठक की अगली तारीख 12 जनवरी मुकर्रर की थी और स्वयं बैठक में आने का फैसला किया था। लेकिन बावजूद इसके विधायक का बोर्ड की बैठक में शामिल न होने भाजपा सभासदों में नाराजगी दिखी । वही दूसरी ओर इस बार भी बोर्ड की बैठक बेनतीजा रही ।

सदन से लेकर बाहर तक हुआ हंगामा

गौरतलब है कि बोर्ड की बैठक के दरमियान प्रोसिडिंग बुक छीनने को लेकर हुए हंगामे के बाद सभी सभासद सदन से बाहर चले आये। सदन के बाहर भी सभासदों के दल और सभासद पति के बीच नगर में लकड़ी गिराने को लेकर काफी हंगामा हुआ। बाद में यह हंगामा अन्य सभासदों के समझाने पर समाप्त हुआ। दूसरी तरफ किसी ने बवाल की सूचना रामनगर थाने पर दे दी जिस कारण सदन का अंतिम चरण पुलिस की मौजूदगी में सम्पन्न हो सका।

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