लखनऊ। गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट में मिली करारी मात के बाद भाजपा के रणनीतिकार नये सिरे से रणनीति बनाने में जुटे हैं। उनकी योजना परवान चढ़ी तो जीत की खुमारी तो उतरेगी साथ ही महागठबंधन के प्रयासों को भी झटका लगेगा। सपा अपनी सीट तो निकाल लेगी लेकिन बसपा के इकलौते उम्मीद्वार की नैय्या डांवााडोल दिख रही है। ठीकरा सपा के सिर पर फूटना तय है। खास यह कि इस योजना के सूत्राधार वह बाहुबली हैं जो भाजपा में शामिल तो नहीं है लेकिन सदन से लेकर बाहर तक समर्थन करते दिखते हैं। अंदरखाने से खबर छन कर आ रही है कि अखिलेश ने नाराज हाशिये पर चल रहे शिवपाल के समर्थक भी क्रास वोटिंग कर सकते हैं। ऐसा पहली बार नहीं होगा क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव में भी आधा दर्जन से अधिक सपा विधायकों ने क्रास वोटिंग की थी। सूबे में प्रचंड बहुमत के साथ चार साल सरकार चलनी है और वक्त की नजाकत भांपते हुए क्रास वोटिंग बड़ी बात नहीं है।

सभी की अखिलेश-मायावती से है नाराजगी

प्रदेश में राजनैतिक दलों के अलावा जो निर्दलीय विधायक हैं उनमें रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैय्या और अमनमणि त्रिपाठी की मायावती से नाराजगी किसी से छिपी नहीं है। एक और निर्दलीय विधायक बाबागंज से विनोद कुमार हैं वह भी इन्हीं के साथ है। रही बात निषाद पार्टी के इकलौते विधायक विजय मिश्र की तो उनके मायावती से रिश्ते ऐसे हैं कि बसपा सरकार में इनामी होने के साथ लंबे समय तक मेरठ जेल के फांसी घर में रखा गया था। अखिलेश ने उनका टिकट काटा था जिसके बाद निर्दलीय चुनाव जीत कर उन्होेंने बाहुबली के बदले जनबली होने का एहसास कराया। उनकी नाराजगी स्थानीय अधिकारियों से है न कि सीएम से। उन्हें भी गठबंधन के बदले दूसरा खेमा ही सुहायेगा।

पहले से कम है एक वोट

राज्यसभा चुनाव का नामांकन भरे जाने के पहले सपा के कद्दावर नेता नरेश अग्रवाल को अपने पाले में लेने के साथ वीजेपी ने अपने इरादे जता दिये थे। नरेश अग्रवाल कह चुके हैं कि उनका विधायक पुत्र सपा को वोट नहीं देगा। एक वोट पहले से कम था और क्रास वोटिंग का खतरा बढ़ने के बाद से महागठबंधन खेमे में खलबली मची है। रही सही कमी बाहुबलियों के तेवर ने पूरी कर दी है।

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