चंदौली। किसी जगह हंगामे की सूचना पर मौके पर पहुंचने वाली पुलिस सभी को पकड़ कर थाने में लाने के बाद हवालात में डाल देती है। किसी मामले में संलिप्तता न भी हो तो पुलिस शांतिभंग की धाराओं के तहत कार्रवाई जरूर करती है जिससे अगली बार ऐसी हरकत करने से पहले सबक याद रहे। ऐसा ही कुछ मझगांवा में हुआ जिसमें कोतवाली पुलिस ने सेट ड्रिल के तहत कार्रवाई तो की लेकिन एक पोन आने के बाद कुछ इस कदर बैकफुट में पर आयी कि पकड़े गये लोगों को घर तक छोड़ने की कवायद में जुट गयी। इलाके में चर्चा का विषय बने प्रकरण पर इंस्पेक्टर कोतवाली अश्विनी चतुर्वेदी ने सफाई दी है कि पुलिस ने मौके से जिन लोगों को पकड़ा था उनमें से एक का चालान किया जबकि दो दर्जन को मुचलके पर रिहा कर दिया।
फायरिंग की सूचना पर पहुंची थी फोर्स
बताया जाता है कि कोतवाली पुलिस फायरिंग की सूचना पर गांव में पहुंची थी। स्कार्पियो समेत दो दर्जन लोगों को मौके से पकड़ा गया। कोतवाली लाने के बाद सभी को हवालात में डाल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक सत्तारूढ़ दल के एक चर्चित विधायक सहित कई लोगों के दबाव पुलिस पर पड़ने लगे। दबाव का नतीजा रहा कि कुंदन सिंह को नवहीं पुलिया के पास से गिरफ्तार दिखने के साथ बाकी लोगों को मुचलके पर छोड़ दिया गया। चर्चाओं के मुताबिक इनमें से कुछ लोग पहले से आपराधिक मामलों में वांछित भी बताये जा रहे हैं। एक को ही असलहे और स्कार्पियो के साथ गिरफ्तार दिखाने जैसा गुडवर्क किसी के गले नहीं उतर रही है।
दबाव के आरोप पहले से हैं
गौरतलब है कि पिछले दिनों कंदवा में हुए दोहरे हत्याकांड के पीछे भी सत्तारूढ़ दल के एक विधायक का दबाव बताया गया है। पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि सुशील सिंह के दवाब में पुलिस ने कार्रवाई को दूर वारदीत की सूचना मिलने पर भी आना गंवारा नहीं किया। पोर्स तब पहुंची जब मासूम समेत दो काल के गॉल में समा चुके थे और पांच जीवन-मृत्य के बीच संघर्ष कर रहे थे।

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