जेल के भीतर इस खातिर मारा गया रईस बनारसी का खास साथी कुख्यात मोनू पहाड़ी, वर्चस्व की लड़ाई में मुन्ना खालिद पड़ा भारी

लखनऊ। कोरोना वाइरस के कहर को देखते हुए प्रदेश की जेलों से सात साल से कम सजा वाले अपराधों में निरुद्ध बंदी छोड़े जा रहे हैं। इसका दूसरा असर भी देखने को मिल रहा है। छुटभैय्या अपराधी जेलों में कुख्यात की ‘सेवा’ में जुटे रहते थे और इनके जाने के बाद अपना सिक्का कायम रखने की जंग शुरू हो गयी है। कुछ ऐसा ही इटावा जेल में हुआ जहां संगीन मामलों के आरोपित कुख्यात अपराधी मोनू पहाड़ी की आगरा के मुन्ना खालिद से भिडंत हो गयी। गणना खत्म होने के बाद दोनों गुटों में मारपीट को नियंत्रित करने में जेलकर्मी भी जख्मी हो गये। सभी को अस्पताल भेजा गया जहां उपचार के दौरान मोनू पहाड़ी ने दम तोड़ दिया। पुलिस रिकार्ड में मोनू डी-2 गैंग का सक्रिय सदस्य होने के साथ गैंगवार में मारे गये कुख्यात बदमाश रईस बनारसी की साथी था।

दोनों ही हटाये गये थे अपनी जेलों से

मुस्लिम बाहुल्य इलाके अनवरगंज (कानपुर) निवासी मोनू ने कम उम्र में ही अपराध जगत में जगह बना ली थी। हत्या,लूट, रंगदारी वसूली सरीखे संगीन मामलों के आरोपित मोनू के खिलाफ गुंडा एक्ट से लेकर गैंगस्टर तक कार्रवाई की थी। जेल जाने के बाद भी उसकी दबंगई कम नहीं हुई और पर्ची भेजकर वसूली से लेकर दूसरे बंदियों की पिटाई कराने जैसी शिकायते आला अफसरों तक पहुंची। प्रशासनिक आधार पर सात अक्टूबर 2016 को उसे इटावा जेल भेज दिया गया। दूसरी तरफ आगरा का रहना वाला दूसरा चर्चित अपराधी मुन्ना खालिद भी कुछ ऐसी ही शिकायतों के चलते यहां भेजा गया था।

कुछ दिनों से बढ़ गयी तनातनी

जेल सूत्रों का कहना है कि दोनों ही कुख्यात अपराधी गरीब और छोटे मामलों के आरोपितों को अपनी ताबेदारी में रखते थे। पिछले दिनों इनमें से अधिकांश को छोड़ा जाने लगा तो कपड़े धोने से लेकर पांव दबाने तक के लिए तलाश होने लगी। दोनों के बीच वर्चस्व को लेकर पहले से खींचतान चल रही थी और पिछले कुछ दिनों से इसी को लेकर टकराव का मौका ढूंढा जा रहा था। गणना के बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हुई जिसे रोकने की कोशिश करने वाले जेल अफसरों, लंबरदार और बंदी रक्षकों पर भी बंदियों ने हमला बोल दिया था। इसमें डिप्टी जेलर समेत छह-सात बंदी व एक दर्जन जेल कर्मी घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल मुन्ना खालिद, मोनू पहाड़ी समेत बंदियों का इलाज किया जा रहा था। वहीं घायल लंबरदार को सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी भेजा गया था। मोनू भी रात को सैफई भेजा गया लेकिन इलाज से पहले मौत हो गयी।

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