डीजी ईओडब्ल्यू की खरी-खरी: वर्षों से लंबित विवेचनाओं को तीन माह में निस्तारित करें मिलकर सभी

वाराणसी। संगीन मामले में तीन माह के भीतर आरोप पत्र दाखिल करना पुलिस के लिए बाध्यकारी होता है लेकिन एक ऐसी भी इकाई है जहां महीनों नहीं बल्कि सालों से विवेचना लंबित हैं। जी हां, आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) में कुछ मामले तो पिछले दशक में जांच के लिए भेजे गये थे। आरोपित सरकारी कर्मचारी रिटायर्ड तक हो चुके हैं लेकिन मामला अभी तक लंबित चल है। महानिदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद राजेन्द्र पाल सिंह ने इस प्रवृति पर लगाम कसने के साथ मामलों की गुणवत्तापूर्वक त्वरित विवेचना पर जोर दिया। अपने दो दिवसीस काशी प्रवास पर आये डीजी ने सिगरा स्थित कार्यालय के निरीक्षण के दौरान लंबित जांच, विवेचना और अभिसूचनाओं की समीक्षा की। डीजी ने पिछले दो वर्षो से प्रचलित जांचो और तीन वर्षों से लम्बित विवेचनाओं पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इन कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर तीन माह के अन्दर गुणवत्ता के आधार पर निस्तारित करने का सख्त निर्देश दिया।

कुछ मामलों पर विशेष ध्यान

डीजी ने स्पष्ट किया कि शासन के प्राथमिकताओं में शामिल बलिया खाद्यान घोटाला की अन्वेषण,बलिया एडेड विद्यालय में शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति की जांच एवं वाराणसी डाकघर में करोड़ों के घोटाले की जांच को प्रमुखता में शामिल करते हुए टीम का गठन किया। निरीक्षण और समीक्षा के दौरान पुलिस अधीक्षक सतेंद्र कुमार और सीओ अखिलेश सिंह भी मौजूद रहे। पिछले कुछ माह से सेक्टर के कार्यो का कुशलता से निस्तारण और वांछितों की गिरफ्तारी पर निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा तथा दो अन्य कांस्टेबिल को उत्कृष्ट कार्यो के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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