वाराणसी। अंतर राज्यीय माफिया सरगना रहे मुन्ना बजरंगी को पूर्वांचल में राजनैतिक हत्याओं के लिए जाना जाता रहा। यह भी एक संयोग है कि विधायक कृष्णानंद राय हो या ब्लाक प्रमुख रामचंद्र सिंह और कैलाश दूबे सभी भाजपा से जुुड़े रहे जिनकी हत्या का आरोप बजरंगी पर लगे। केन्द्र के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तभी से बजरंगी पर शिकंजा कसने की आशंका जतायी जाने लगी। स्व. कृष्णानंद राय की 29 नवंबर को मोहम्मदाबाद (गाजीपुर) में एक बाहुबली विधायक ने ललकारते हुए कहा था कि शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी। जेल में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ होगी। राजनेता जनसभा में ऐसे भाषण देते रहते हैं लेकिन लगभग साढ़े सात महीने बाद सभा में किया गया दावा सच साबित हुआ।

विधवाओं का ‘आह’ लगी

मोहम्मदाबाद की विधायक और स्व. कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने बजरंगी के मारे जाने पर खुशी जतायी है। उनका कहना था कि यह तो भगवान का न्याय है। मेरे पति के साथ कई और लोग मारे गये थे। बजरंगी ने न जाने कितनों की हत्या की थी। उनकी विधवाओं की आह कहां जायेगी। मुझे घटनाक्रम के बारे में टीवी से जानकारी हुई लेकिन जो हुआ वह ठीक है। मुझे अपनी जान की परवाह नहीं लेकिन परिवार के उपर खतरा हमेशा रहता था। बच्चों को लेकर खासी चिंंता रहती थी। कहना न होगा कि कृष्णानंद राय हत्याकांड प्रदेश की सर्वाधिक चर्चित वारदात थी। आरोपितों को संरक्षण सरीखे आरोप तत्कालीन सपा सरकार के उपर भी लगे थे। अलका राय सवा दशक से इसकी कानूनी लड़ाई लड़ रही है। इसी का नतीजा रहा कि मामले की विवेचना पुलिस से सीबीआई को गयी और सुनवाई भी दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में हो रही है। अगले सप्ताह इस मामले की एक बार फिर से सुनवाई होनी है।

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