370 पर प्रियंका की राय ‘जोड़ीदार’ से इतर, पार्टी के रूख कर करते हुए समर्थन उठाये ‘तरीके’ पर सवाल

सोनभद्र। पिछले लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने अमोध ‘अस्त्र’ के रूप में प्रियंका वाड्रा का इस्तेमाल किया था। प्रियंका अब तक गांधी परिवार की होने के नाते मां सोनिया और भाई राहुल के संसदीय क्षेत्र तक सीमित रहती थी लेकिन पहली बार महासचिव बनाते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की जिम्मेदारी दी जबकि पश्चिम का प्रभारी केन्द्रीय मंत्री रह चुके सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपी। परिणाम आये तो पार्टी को करारा झटका लगा क्योंकि परिवार की परम्परागत सीट पर राहुल की हार हो गयी। प्रियंका के जिम्मे जो 27 सीटे थी उसमें सिर्फ सोनिया जीत सकी। इन दिनों जब जम्मू-कश्मीर को लेकर पार्टी में तमाम विरोध के स्वर उठ रहे हैं तो प्रियंका पूरी तरह से पार्टी के साथ नजर आयी। मंगलवार को सोनभद्र के दौरे पर उन्होंने केन्द्र सरकार पर हमला करते हुए सवाल उठाये।

पार्टी में सबको अपनी बात कहने का हक

गौरतलब है कि प्रदेश के दूसरे प्रभारी ज्योतिरादित्य इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार के साथ दिखे लेकिन प्रियंका ने इसका बखूबी बचाव किया। उनका दावा था कि कांग्रेस में लोकतंत्र है और सबको अपनी बात कहने की आजादी है। सरकार ने जिस तरीके से इसे हटाया वह पूरी तरह से असंवैधानिक है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जिन नियम-कानून का पालन करना होता है वह इसमें नहीं हुआ है। सवाल यह है कि भाजपा मनमाने तरीके से विरोध के स्वर को दबाते हुए लोकतंत्र का गला घोंट रही है जिसका विरोध हर स्तर पर किया जायेगा।

टाल गयी अहम सवाल

इन दिनों कांग्रेस में अनुच्छेद 370 को लेकर दो धडे साफ दिख रहे हैं। एक तरफ तो ज्योतिरादित्य सिंधिया, जनार्दन द्विवेदी सरीखे पुरनियों से लेकर आदिति सिंह और ज्योति मिर्घा समेत युवा नेताओं का मानना है कि हटाना सही निर्णय था। दूसरी तरफ परम्परागत रूप से गांधी परिवार के ‘वफादार’ माने जाने वाले पी. चिदंंम्बरम, मणिशंकर अय्यर, सलमान खुर्शीद से लेकर शशि थरूर तक इसे दूसरा ‘फिलास्तीन’ बनाने से लेकर मुस्लिम विरोधी करार दे रहे हैं। इन नेताओं के बयान के बारे में पूछे जाने पर प्रियंका पूरी तरह से अनसुनी करती दिखी और परोक्ष रूप से भी टिप्पणी नहीं की।

Related posts