प्रियंका दे पायेंगी ‘भाई’ की सफाई जो कह रहा दोहरा देंगे ‘भीमा-कोरेगांव’, इधर तय हुआ दौरा उधर आया बयान

लखनऊ। कांग्रेस के लिए आरपार की लड़ाई बने इस लोकसभा चुनाव में राहुल ने अंतिम अस्त्र के रूप में बहन प्रियंका को उतार दिया है। सपा-बसपा के गठबंधन से इनकार के बाद कांग्रेस के लिए करो या मरो सरीखी स्थिति आ गयी थी। प्रियंका को राजनीति में उतारने की मांग काफी दिनों से हो रही थी और इसकी घोषणा होने के बाद ‘नाक’ से लेकर तेवर तक दादी से जोड़ते हुए अबकी चुनाव में चमत्कार का दावा किया जाने लगा। दो दिन पहले मेरठ में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर से मुलाकात के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने जिस तरह प्रतिक्रिया दी थी उससे साथ था कि प्रियंका ने मनोवैज्ञानिक बढ़त ले ली है। इससे उत्साहित प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने ‘भाई-बहन’ की मुलाकात बताते हुए गठबंधन पर तंज भी कसे थे। शुक्रवार को जिस समय प्रदेश कांग्रेस कमेटी पीएम मोदी को घेरने के लिए प्रयाग से काशी तक के दौरे का कार्यक्रम जारी कर रही थी उसी समय चंद्रशेखर का एक बयान गले की फांस बन गया।

दौरे के कार्यक्रम में धर्म के साथ थे इमोशन

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रियंंका के कार्यक्रम को सधे अंदाज में तैयार किया था। सड़क के बदले गंगा से उन्हें लाने की तैयारी थी। पहले ही दिन शिव मंदिर में दर्शन कराने के साथ पुलवामा हमले में शहीद के परिजनों से मिलवाना तय किया। अगले दिन मंदिरों में दर्शन के साथ मजार में भी मत्था टेकना सुनिश्चित किया गया था। गांधी परिवार के करीबी पं. ललितेश जहां से चुनाव लड़ रहे वहां के मंदिरों मजारों को कार्यक्रम में प्रमुखता दी गयी थी। रोड शो से लेकर वकीलों से मुलाकात को भी जोड़ा गया है। माना जा रहा था कि प्रियंका गंगा में प्रयागराज से काशी की दो दिनों तक यात्रा कर पीएम मोदी को उन्हीं के अंदाज में घेरने में सफल रहेंगी।

चंद्रशेखर ने दिखाये पुराने ‘तेवर’

प्रियंका से भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर की मुलाकात मेरठ के अस्पताल में हुई थी लेकिन अगले दिन ही वह पुलिस को चकमा देकर ‘गायब’ हो गये। चंद्रशेखर ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक दिल्ली के जंतर-मंतर में रैली की लेकिन वह अपने पुराने अंदाज में आ गये। जुटे समर्थकों से कहा, मनुवाद का पोषक कभी तुम्हारा हितैषी नहीं हो सकता है। यही नहीं वह तो यहां तक कह बैठे कि ‘भीमा-कोरेगांव दोहरा देंगे…. अब तक इसकी जरूरत नहीं आई है लेकिन जिस दिन इस देश के संविधान पर आंच आई तो भीमा-कोरेगांव भी दोहरा देंगे’। कांग्रेस जहां मुस्लिम-दलित समीकरणों पर फोकस किये है वहीं सवर्ण मतदाताओं को भी अपने खेमे में लाने का प्रयास कर रही है। माना जा रहा है कि ऐसे में भीम आर्मी प्रमुख के बयान गले की फांस बन सकते हैं और प्रियंका को गंगा से अधिक इन पर जवाब देने पड़ सकता है।

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