कुंडा (प्रतापगढ़)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का चरण जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, राजनीतिक दलों के बीच जोर-आजमाइश भी बढ़ती जा रही है। उप्र के प्रतापगढ़ जिले की सात विधानसभा सीटों पर इस बार चुनाव में दो दिग्गजों की परीक्षा भी हो रही है। ये कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी और अपनी हनक के लिए जाने जाने वाले प्रदेश सरकार के मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ है। गौरतलब है कि इस चुनाव में सूबे में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन है। राजा भैया सरकार में मंत्री हैं लेकिन निर्दल लड़ रहे हैं, जबकि सपा उन्हें समर्थन दे रही है। गठबंधन के चलते धुर विरोधी माने जाने वाले ये दोनों दिग्गज इस चुनाव में साथ रहेंगे, जिससे यह माना जा रहा है कि यहां की सभी सीटों पर रोचक चुनाव होगा।

गठबंधन के बाद जिले की सात में से तीन पर सपा, दो पर कांग्रेस और दो पर निर्दलीय उम्मीदवार हैं। दोनों निर्दलियों को सपा व कांग्रेस का समर्थन है। इसमें पट्टी से राम सिंह पटेल, सदर से नागेंद्र सिंह व रानीगंज से शिवाकांत ओझा सपा के उम्मीदवार हैं तो रामपुर खास से आराधना मिश्र ‘मोना’ और विश्वनाथगंज से संजय पांडेय कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। सरकार के मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ कुंडा से और विनोद सरोज बाबागंज (सुरक्षित) से निर्दलीय उम्मीदवार हैं। इन दोनों सीटों पर सपा-कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। रामपुर खास से भाजपा प्रत्याशी नागेश प्रताप सिंह उर्फ छोटे सरकार हैं। उन्होंने प्रमोद तिवारी पर धमकाने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “लोग मोदी की नीतियों से काफी प्रभावित हैं। इस बार रामपुर खास में कमल जरूर खिलेगा, लेकिन यहां तिवारीजी के लोग लगातार धमका रहे हैं।”

रामपुर खास से कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के नाम विशेष कीर्तिमान भी है। वह वर्ष 1980 से 2012 तक लगातार नौ बार विधायक चुने जाते रहे। राज्यसभा सदस्य चुने जाने से पहले वर्ष 1991 से 2012 तक वह कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता भी रहे। दिवंगत वीर बहादुर सिंह और नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्रित्व काल में वह प्रदेश सरकार के मंत्री भी रहे। अपने पिता का गढ़ रही रामपुर खास सीट से आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने पहली बार वर्ष 2014 में विधानसभा में कदम रखा। पिता प्रमोद तिवारी के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के कारण यह सीट खाली हुई थी। आराधना मिश्रा कहती हैं, “पिताजी ने इस इलाके के लिए काफी कुछ किया है। यहां के विकास के लिए हमने भी विधायक बनने के बाद काफी काम किया है। इस बार भी काम के दम पर जीत जरूर मिलेगी।”

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ गठबंधन के सवाल पर मोना ने कहा, “यह गठबंधन काफी अच्छा साबित होगा और उप्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगा। उप्र को दो युवाओं का साथ जरूर पसंद आएगा।” इधर, राजा भैया भी वर्ष 1993 से 2012 तक कुंडा से लगातार पांच बार निर्दलीय विधायक रहकर उन्होंने रिकार्ड बनाया है। इस बार भी वह प्रदेश सरकार में मंत्री रहते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले भी सपा तीन बार उन्हें समर्थन दे चुकी है। वर्ष 1996 में भाजपा ने भी उन्हें समर्थन दिया था। राजा भैया कल्याण सिंह, दिवंगत राम प्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह व मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में भी मंत्री रहे।

इससे पहले कुंडा सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नियाज हसन का कब्जा रहा। वह वर्ष 1962 से 1889 तक यहां से पांच बार विधायक रहे। राजा भैया के सियासी रसूख के कारण बाबागंज सीट पर वह अपने करीबी विधायक को चुनाव जिताते रहे हैं। इस सीट से उनके करीबी विनोद सरोज चुनाव लड़ते हैं। पहले उनके पिता इस सीट से चुनाव जीतते थे। रामपुर खास क्षेत्र सीट प्रमोद तिवारी का गढ़ माना जाता है तो कुंडा को राजा भैया का इलाका कहा जाता है। जिले में दोनों की सियासी प्रतिस्पर्धा हमेशा से रही है, लेकिन इस बार दोनों के साथ होने से यहां की सीटों पर होने वाले मुकाबले काफी रोचक होने की संभावना है। भाजपा को यहां जीत के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। उल्लेखनीय है कि यहां चौथे चरण में 23 फरवरी को मतदान होगा।

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