वाराणसी। किसी जमाने में उनका आतंक इतना था था कि जिला और प्रदेश नहीं बल्कि कई राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती थे। विरोधी को चुन-चुन कर खत्म करना इनकी खासियत थी। अत्याधुनिक असलहों से विरोधी पर अंधाधुंध फायरिंग कर उसके साथ मौजूद लोगों को मौत के घाट उतारने के मुकदमे पुलिस के रिकार्ड में दर्ज हैं। बावजूद इसके लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद पूर्वांचल के माफियाओं ने अपना अंदाज बदल लिया है। इसे प्रतिद्वंदी की मजबूती मानी जाये या शूटरों का संकट लेकिन एमएससी बृजेश सिंह से लेकर मुन्ना बजरंगी सरीखे माफिया डॉन इन दिनों एके 47 और 9 एमएम पिस्टल को छोड़कर ‘कलम’ पर निर्भर हो गये हैं। सामान्य नागरिक की तरह यह पुलिस-प्रशासन से लेकर कोर्ट तक से गुहार लगा रहे हैं कि ‘विरोधी’ के खिलाफ कार्रवाई की जाये। बजरंगी ने तो पहले कोर्ट से गुहार लगायी लेकिन उस पर कार्रवाई न होते पत्नी सीमा सिंह से प्रेस क्रांफ्रेस करा कर गुहार लगायी जबकि बृजेश सिंह ने परोक्ष रूप से मीडिया के जरिये विरोधी के उपर निशाना साधा।

एक दशक से हैं सलाखों के पीछे

दरअसल पुलिस रिकार्ड में माफिया डॉन बृजेश अब एमएलसी हो चुके हैं। बावजूद इसके एक दशक से अधिक समय से वह जेल की सलाखों के पीछे हैं। काफी मामलों में वह बरी हो चुके हैं लेकिन सिकरौरा कांड उनके लिए बड़ी समस्या है। इस मामले में वादिनी हीरावती के विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक तमाम आरोप लगाते रहे हैं। पिछले दिनों बीएचयू अस्पताल में भर्ती को लेकर उठे सवालों को लेकर बृजेश ने आम नागरिक की तरह कोर्ट से गुहार लगाते हुए कार्रवाई की मांग ही नहीं की बल्कि अपना बयान दर्ज कराया।

बजरंगी की पत्नी लगा ही हैं गुहार

माफिया मुन्ना बजरंगी पर भी भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड से लेकर दूसरे कई सामूहिक हत्याओं के आरोप हैं। बजरंगी को भी जेल की सलाखों के पीछे एक दशक होने वाला है। इस अवधि में साले पुष्पजीत उर्फ पीजे से लेकर तारिक तक की हत्याएं हो चुकी है। चौंकाने वाला सच यह है कि इनमें से किसी का बदला लेने के बदले बजरंगी भी कानूनी रास्ता अख्तियार कर रहा है। इसे शूटरों की कमी या मजबूरी का सौदा समझा जाये लेकिन बजरंगी की तरफ से पत्नी सीमा सिंह को मीडिया के सामने आगे आकर सीएम योगी से लेकर कोर्ट तक से गुहार लगानी पड़ रही है।

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