वाराणसी। प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह सोमवार को कोर्ट में गवाही देने के लिए आने को थे। स्पेशल जज एंटी करेप्शन के यहां गवाही होनी थी। इसी भवन में गैंगस्टर कोर्ट है जहां सिकरौरा कांड की सुनवाई चल रही है। इस मामले में आरोपित एमएलसी बृजेश सिंह हैं। पेशी पर उन्हें लेकर आने की खातिर भतीजे और सैयदराजा के विधायक सुशील सिंह सेन्ट्रल जेल पहुंचे थे। डीजीपी का दोनों से आमना-सामना न हो इसके लिए पुलिस ने खासी मशक्कत की। अमूमन हर बार पेशी की खातिर बृजेश सिंह को 11 बजे तक कोर्ट लाया जाता है लेकिन सोमवार को फोर्स उन्हें लगभग साढ़े 12 बजे लेकर पहुंची। वह भी तब जब गवाही के बाद डीजीपी वहां से निकल चुके थे। दरअसल उन्नाव गैंगरेप के मामले में आरोपित विधायक कुलदीप सेंगर के लिए डीजीपी ने ‘माननीय’ शब्द का इस्तेमाल किया था जिसके बाद खासा बवाल मचा था। इस बार कुछ ऐसा न हो इसके लिए पुख्ता प्रबंध किये गये थे।

पहली दफा कोई डीजीपी पहुंचा बार तक

गवाही के बाद सेंट्रल बार महामन्त्री संजय सिंह दाढ़ी के अनुरोध पर सेंट्रल बार असोसिएशन भवन पहुंचे। यहां बार के अध्यक्ष प्रभुनाथ पाण्डेय,पूर्व अध्यक्षद्वय हरिशंकर सिंह व अशोक सिंह प्रिन्स ने स्वागत किया। डीजीपी ने कहा कि वह न्यायपालिका का सम्मान करते है। यहां डीजीपी की हैसियत के बजाय गवाह बनकर आया हूं और कोर्ट में गवाही दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि नए विवेचकों को अधिवक्ताओं से कानूनी बारीकियां सीखनी चाहिए। अधिवक्ताओं को कानून की बेहतर जानकारी है। ऐसे में पुलिस और अधिवक्ताओं को सेमिनार और संवाद आयोजित कर बेहतर काम करना होगा। इसका प्रयोग लखनऊ में जल्द शुरू होने जा रहा है बनारस में भी इसकी शुरूआत करने की बात कही। इस दौरान एडीजी,एसएसपी,एसपीआरए भी मौजूद रहे। डीजीपी ने पुलिस को अधिवक्ताओं से कानूनी जानकारी लेने पर भी बल दिया,वार्ता के दौरान काफी संख्या अधिवक्ता मौके पर जुटे रहे,प्रेदश का कोई डीजीपी पहली बार सेंट्रल बार पंहुचा और वकीलों के बीच जाकर सहभागिता की इससे वकीलो में हर्ष है।

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