पुलिस-प्रशासन ने दिया प्रियंका को फुल ‘प्रोटोकाल’, प्रयास के बावजूद नहीं उठा सकी एक भी ‘सवाल’

सोनभद्र। कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा इन दिनों प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए जोर लगा रही है। यही कारण था कि 17 जुलाई को उभ्भा गांव (घोरावल) में भूमि विवाद में 10 लोगों की मौत और दो दर्जन के घायल होने की जानकारी मिलने के बाद वह मिलने के लिए रवाना हो गयी। यह बात दीगर है कि प्रशासन ने उन्हें जाने नहीं दिया और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए चुनार किले में रखा। कांग्रेस ने इसका पुरजोर विरोध किया और मुद्दे को उठाने की चेतावनी दी। प्रियंका ने दिल्ली जाने के बाद पीड़ितो कोो 10-10 लाख के चेक भी भिजवाये। घटना के 27 दिन बाद एक बार फिर प्रियंका उभ्भा के लिए चली लेकिन इस बार मंजर कुछ दूसरा ही देखने को मिला। भले ही वह किसी सदन की सदस्य नहीं हैं लेकिन गांधी परिवार से जुड़ा होने के नाते पुलिस-प्रशासन ने फुल प्रोटोकाल का पालन किया।

पुख्ता थे इंतजाम, रखा पूरा ध्यान

प्रियंका को एसपीजी सुरक्षा मिली है जिसके तहत एडवांस सिक्योरिटी लाइजनिंग के लिए एक टीम सोमवार को जिले में पहुंच गयी थी। अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी और जीएम जेपी इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 12 और 13 अगस्त को चार-चार सूट आरक्षित करा रखे थे। एआरटीओ ने एक मिनी ट्रक, पांच छोटे वाहन ड्राइवर के साथ मंगलवार को पुलिस लाइन में उपलब्ध कराये थे। एसपी प्रभाकर चौधरी ने प्रियंका के आगमन पर उभ्भा समेत आसपास के गांवों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर उन्हें संदिग्धों पर पैनी नजर रखने का निर्देश दिये थे। एसडीएम केएस पांडेय सहित पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, बिजली विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों ने मंगलवार को प्रियंका गांधी के कार्यक्रम के मद्देनजर उभ्भा में विभिन्न व्यवस्थाओं और तैयारियों में जुटे रहे।

पहले ही ‘मैनेज’ हो गया था मामला

प्रियंंका ने पीड़ित परिवारों के साथ मुलाकात ही नहीं की बल्कि घटनास्थल भी जाकर देखा जहां पर फायरिंग हुई थी। डेढ़ घंटे से अधिक समय बिताने के बावजूद पीड़ितो की तरफ से कोई ‘शिकायत’ न मिलने पर कांग्रेसी सकते में थे। दरअसल सीएम योगी पहले ही यहां अकर 18.5 लाख की आर्थिक मदद के अलावा भूमि पर कब्जेदारों का नाम चढ़ाने का आदेश दे चुके हैैं। इसके अलावा उन्होंने पूरे मामले में जिस तरह कांग्रेस को घेरा था उससे अधिक जन समर्थन नहीं मिला। अलबत्ता प्रियंका ने पीड़ित परिवारों पर क्रास केस का मुद्दा उठाया लेकिन इसे भी जांच के बाद खत्म करने का आश्वासन पहले ही दिया जा चुका है। कुल मिला कर प्रियंका जिस ‘उम्मीद’ के साथ आयी थी वह पूरी होते नहीं दिखी अलबत्ता यह साफ हो गया कि अब योगी सरकार को घेरने के लिए वह प्रदेश में सक्रियता बढ़ा सकती हैं।

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