वाराणसी। पिंड्रा तहसील से दस गांवों को निकाले जाने का मामला तूल पकड़ने लगा है। जिला प्रशासन के आदेश के खिलाफ तहसील के वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है। वकीलों का गुस्सा खासतौर से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के खिलाफ है। वकीलों का आरोप है कि महेंद्र नाथ पांडेय पिंड्रा तहसील का अस्तित्व खत्म करना चाहते हैं।

निकाले गए दस गांव

पिण्डरा तहसील के गठन के समय लगभग 800 गांव थे। साल 2003-4 के आस-पास 258 गाँवों को पिण्डरा तहसील से निकालकर सदर तहसील में जोड़  दिया गया था। इसके बाद एक बार फिर से 10 गाँव को पिण्डरा से निकालकर सदर में किया जा रहा है। इससे नाराज वकीलों का आरोप है कि जब 258 गांव निकले थे उस समय महेंद्र पाण्डे विधायक थे। आज बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर वही कहानी दोहराई जा रही है। वकीलों का कहना है महेंद्र पाण्डे के वजह से पिण्डरा तहसील का अस्तित्व खतरे में है।

वकीलों ने दी आंदोलन की धमकी

जिला प्रशासन के आदेश के खिलाफ वकील अब आंदोलन के मूड में दिखने लगे हैं। वकीलों ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि जब तक गाँवों को पिण्डरा तहसील से फिर से नहीं जोड़ा जाता है तो उनका हड़ताल जारी रहेगा। वकीलों का कहना है सरकार पिण्डरा तहसील को ही क्यों नहीं सदर वाराणसी में मर्ज कर देती है। विरोध करने वालों में पिण्डरा तहसील के अध्यक्ष शिवपूजन सिंह,महामंत्री राजेश पटेल,उपाध्यक्ष संजय वर्मा,राजेश सिंह महँगाव, सुधीर सिंह प्रधान ,कमला मिश्रा,शैलेन्द्र सिंह,नवीन सिंह अदि बहुत से कार्यकर्ता मौजूद थे।

admin

No Comments

Leave a Comment