वाराणसी। देश के प्रधानमंत्री और स्थानीय सांसद नरेंद्र मोदी अपनी मेहमान नवाजी के लिए मशहूर हैं। मोदी एक बार फिर से अपने विदेशी दोस्त की खातिरदारी के लिए तैयार हैं। इस बार नाम है फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुल मैक्रों का। अपने खास मेहमान के साथ मोदी 12 मार्च को वाराणसी आ रहे हैं। मोदी के इस खास दोस्त के लिए पूरी काशी को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। पूरे शहर को नया रंग दिया जा रहा है। लगभग 6 घंटे के प्रवास के दौरान दोनों हस्तियां यूं तो कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगी लेकिन सबकी नजरें गंगा की लहरों पर होने वाले नौकाविहार पर टिकी हुई है। मोदी अपने विदेशी मेहमान को गंगा और उसके किनारे घाटों की श्रृंखला का दीदार कराएंगे।

धंसने लगी है काशी की धरोहर

तय कार्यक्रम के मुताबिक प्रधानमंत्रत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुल मैक्रों के साथ अस्सी घाट ले लेकर खिड़किया घाट तक नौकायन करेंगे। इन दोनों घाटों के बीच काशी की धरोहर की एक लंबी लिस्ट है। गंगा किनारे घाटों के अलावा कई प्राचीन इमारतें और मंदिर भी हैं। कहते हैं इन घाटों और इमारतों में ही काशी की जान बसती है। लेकिन वक्त बीतने के साथ ये धरोहर धंसने लगे हैं। मां गंगा गुस्से में हैं तो घाटों और उसके किनारे बनी इमारतों की सांसें थमने लगी हैं। आस्था के इन धार्मिक स्थलों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जिन घाटों पर हर रोज हजारों भक्त पहुंचते हैं वहां प्रशासनिक लापरवाही चरम पर है। वो भी तब जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद यहां के सांसद है। बरसो बाद बनारस में किसी ऐसा नेता ने गंगा को चुनावी मुद्दा बनाया। जिसने गंगा को लोगों की जनभावनाओं को जोड़ा। यहां के लोगों में उम्मीद की एक लौ जगाई। लेकिन हकीकत की जमीं पर न तो गंगा साफ हुई और न ही गंगा किनारे बने धरोहर ही महफूज रह गए हैं। बनारस में एक दर्जन से अधिक ऐसे घाट हैं जिनकी सीढ़िया दरकती जा रही हैं। कुछ जगहों पर तो सीढ़ियों ने अपना स्थान छोड़ दिया है।

टूटे घाटों को लेकर गुस्से में लोग

अब सवाल इस बात का है कि क्या मोदी अपने विदेशी मेहमान को जहरीली होती जाह्नवी और टूटे फूटे घाट दिखाएंगे। लोग पूछ रहे हैं कि क्या मैली होती गंगा का दीदार कराकर मोदी देश की बेइज्जती कराने पर तुले हैं ? खैर लोगों का ये गुस्सा जायज भी है। घाटों और गंगा की दुर्दशा के लिए जितना जिला प्रशासन जिम्मेदार है उतना ही केंद्र सरकार। लगभग डेढ़ साल पहले अपना भारत की टीम ने काशी के प्रभू घाट, भदैनी घाट, शिवाला घाट, जानकी घाट, शिवाला घाट, माता आनंदमयी घाट, तुलसी घाट, गंगा महल घाट, रीवा घाट और महानिर्वाण घाट की दुर्दशा को प्रकाशित किया था। खतरे में पड़ते इनके वजूद को बताया था। लेकिन हैरानी इस बात की है कि लंबा वक्त गुजर जाने के बाद, अब तक इस दिशा में कोई खास पहल नहीं हुई। हालांकि उस वक्त ये दावा किया गया था कि जल्द ही घाट की सीढ़ियों की मरम्मत कर ली जाएगी लेकिन आज भी तस्वीर जस की तस है। हकीकत ये है कि गंगा किनारे 26 घाटों को संवारने के लिए लगातार तीसरी बार कोई कंपनी आगे नहीं आई। नगर निगम फिर इन घाटों के सुदृढ़ीकरण कार्य का री-टेंडर करने जा रहा है। तीन महीने पहले नमामि गंगे के तहत 10.76 करोड़ रुपए की कार्ययोजना स्वीकृत हुई थी।

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