कांग्रेस के ‘ओबीसी’ कार्ड से लल्लू हुए पास, पुरनियों के न काम आया ‘घराना’ न ही काम ‘पुराना’

लखनऊ। लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने अपने ‘तुरुप’ के इक्के के रूप में प्रिंयका वाड्रा का दांव भी अजमा लिया लेकिन नतीजा आया तो पुश्तैनी सीट से राहुल गांधी तक हार गये। समूचे प्रदेश में सिर्फ एक सीट सोनिया गांधी के चलते रायबरेली की मिली। यह दशा तब थी जब प्रमुख विपक्षी दल के रुप में सपा-बसपा गठबंधन ने इनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारे थे। जिस जोर-शोर के साथ प्रियंका की लांचिंग की गयी थी वह फिस्स साबित हुई। बावजूद इसके प्रदेश में उनकी सक्रियता बढ़ाने के साथ 2022 के चुनाव में सीएम के दावेदार के रूप में पेश किया जाने लगा। सोमवार को जब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अजय कुमार लल्लू को पेश किया गया तो साफ हो गया कि कांग्रेस अब दूसरे दलों की तर्ज पर ओबीसी कार्ड खेलने को विवश हो चुकी है। यह बात दीगर है कि दबी जुबान से कांग्रेसी ही गांधी परिवार से नजदीकी के अलावा नये अध्यक्ष की खासियत नहीं गिना पा रहे हैं।

राज बब्बर के विकल्प में थे कई नाम

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में जुझारू नेताओं की कोई कमी थी। भाजपा से लेकर दूसरे दलों की लहर के बावजूद अपना स्थान बरकरार रखने वाले राज्यसभा सांसद रहे प्रमोद तिवारी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह सहित कुछ और नाम भी रेस में थे। पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा के दौरे से पहले भूमिका तैयार करने के संग वहां कैंप कर माहौल बनाने वाले कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू के अध्यक्ष होने की उम्मीद तक किसी को नहीं थी। माना जा रहा हैै कि पार्टी की कमान संभार रही सोनिया गांधी ने प्रियंका वाड्रा के भरोसेमंदों में रहे लल्लू के नाम पर मुहर लगा दी। लल्लू का पिछड़ी जाति से होना भी अहम रहा क्योंकि भाजपा से लेकर सपा-बसपा सभी के प्रदेश अध्यक्ष इसी वर्ग से हैं।

बाहरियों से नहीं गुरेज, पुरनियों को मिला यह इनाम

अब तक कांग्रेस में दूसरे दलों से आने वालों को टिकट तो मिल जाता था लेकिन संगठन में अहम स्थान नहीं दिया जाता था। अब यह भी परम्परा टूटती नजर आ रही है। नयी कमेटी के चार उपाध्यक्षों में वीरेंद्र चौधरी बसपा से आए तो दीपक कुमार सपा में मंत्री पर थे। सिके अलावा महासचिवों में सपा से आये राकेश सचान तथा कैसर जहां अंसारी व शाहनवाज आलम को सचिव बनाया गया है। सलाहकार परिषद में स्थान पाने वालों में नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा में कैबिनेट मंत्री के संग सरकार में दूसरे नंबर पर रहे हैं। वर्किंग ग्रुप में शामिल राजकिशोर सिंह भी पार्टी में नए हैं। खास यह कि नयी टीम में ऐसे कई चेहरे हैं जिन्हें आम कांग्रेसी तो छोड़िये संगठन के मौजूदा पदाधिकारी नहीं जानते हैं।

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