ईवीएम पर बवाल: एग्जिट पोल का कमाल या गठबंधन की सोची-समझी चाल, एक साथ कई जिलों में हुआ बवाल

वाराणसी। लोकसभा चुनावों में छठें और सातवें चरण में पूर्वांचल के जिलों में वोट पड़े हैं। मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। इस्तेमाल की गयी ईवीएम स्ट्रांग रूम में रख दी गयी जिसकी निगरानी सीसी कैमरों के संग राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि भी करने लगे। इस बीच विभिन्न चैनलों में एग्जिट पोल दिखाये जाने लगे जिसमें एक बार फिर से एनडीए को पूर्ण बहुमत मिलते दिखाया गया। इस पर विपक्षी दलों की तरफ से प्रतिक्रिया आने लगी। सोमवार की शाम एकसाथ कई जिलों में ईवीएम को लेकर अफवाहों का सिलसिला आरम्भ हो गया। खास यह कि हर जगह बवाल करने वाले गठबंधन के प्रत्याशी थे और अपने यहां का नहीं बल्कि दूसरे जिले में गड़बड़ी का हवाला दे रहे थे। जौनपुर सरीखा जिला जहां 12 मई को वोट पड़ चुके थे वहां भी एक सप्ताह तक कुछ नहीं हुआ लेकिन समीपवर्ती जिलों से मिली सूचना के बाद हंगामा किया गया। सूत्रों की माने तो गठबंधन की तरफ से रणनीति के तहत समूचा बवाल किया गया था। नतीजे यदि एग्जिट पोल में अनुसार आये तो बाद में आरोप मढ़ने में आसानी रहेगी।

अफजाल सरीखा नेता कर रहा था अगुवाई

हंगामें की शुरूआत चंदौली से हुई जहां रिजर्व रखी खाली ईवीएम को दूसरे स्थान पर रखने को लेकर सपाइयों ने हंगामा किया। कुछ देर में अपने लाव लश्कर के संग जंगीपुर में पूर्व सांसद अफजाल अंसारी जा धमके। चंदौली का हवाला देते हुए उन्होंने ईवीएम बदले जाने की आशंका जतायी। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के भाई के संग कई ऐसे लोग भी थे जो पुलिस से जानबूझ कर टकराव की स्थिति पैदा कर रहे थे। एसओ का तो हाथ पकड़ कर धक्का-मुक्की की गयी जबकि सीओ और एसडीएम के साथ भी बर्ताव सही नहीं था। काफी समझाने के बाद यहां मामला शांत हुआ। उधर मुख्तार के एक अन्य करीबी अतुल राय जो घोसी से लड़ रहे हैं वहां भी कुछ इसी तरह बवाल शुरू किया गया। आधी रात तक बवाल चलता रहा और अंतत: पुलिस ने स्थिति काबू करने के लिए लाठी पटक कर सबको वहां से खदेड़ा।

अखिलेश के नेतृत्व में सोशल मीडिया पर थी सक्रियता

समूचा प्रकरण एक रणनीति के तहत इसलिये भी माना जा रहा है कि सपा के मुखिया खुद ईवीएम को लेकर ट्वीट कर रहे थे। आला कमान की नजर में आने के लिए दूसरे नेता फेसबुक से लेकर दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सक्रिय हो गये। दशा तो यह थी कि जौनपुर जहां एक सप्ताह पहले वोटिंग हो चुकी है वहां सीसी कैमरों को बंद कर ईवीएम शिफ्ट करने की अफवाह फैलायी गयी। अफवाहों की जद में पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र काशी तक रहा जहां आला अफसरों को आधी रात के बाद मोर्चा संभालना पड़ा। समूचे घटनाक्रम का असर रहा कि गठबंधन ईवीएम पर सवाल उठाने में सफल रहा और मीडिया में इसकी चर्चा हो गयी। खास यह कि जहां बसपा प्रत्याशी थे वहां भी कमान एक तरह से सपा नेताओं ने संभाल रखी थी।

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