गाजीपुर। लोकसभा चुनाव के पहले जिले के दो सियासी क्षत्रपों के बीच जंग तेज होने लगी है। एक ओर रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा हैं तो दूसरी ओर सपा के कद्दावर नेता ओमप्रकाश सिंह। दोनों, एक दूसरे को पटखनी देने की कोशिश में लगे रहते हैं लेकिन बेहद खामोशी से। अलबत्ता समर्थकों के बीच जुबानी जंग जरुर जारी रहती है। ताजा मामला ओमप्रकाश सिंह के गढ़ भदौरा से जुड़ा है। यहां के लोगों ने केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा पर सौतेलापन का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। लोगों का आरोप है कि मनोज सिन्हा जानबूझकर भदौरा रेलवे स्टेशन की उपेक्षा कर रहे हैं।

 

सौतेलेपन के खिलाफ सड़क पर लोग

पिछले चार सालों से उपेक्षा का दंश झेल रहे भदौरा के लोगों का सब्र शुक्रवार को जवाब दे गया। ग्रामीणों और व्यापारियों ने मंत्री के सौतेलेपन के खिलाफ प्रदर्शन शुरु कर दिया। व्यापारियों ने शुक्रवार को काला दिवस के रुप में मनाने का निर्णय किया। इस दौरान भदौरा बाजार पूरी तरह बंद रहा। सिर्फ इक्का दुक्का दुकानें ही खुली थी। विरोध के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। बावजूद इसके प्रदर्शनकारियों ने  मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालात को काबू में लाने के लिए पुलिस को हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा।

 

मनोज सिन्हा के खिलाफ बढ़ता गुस्सा

जानकार बताते हैं कि मनोज सिन्हा के खिलाफ भदौरा में प्रदर्शन, उपचुनाव में बीजेपी की हार का साइडइफेक्ट है। मनोज सिन्हा की गिनती भले ही विकास पुरुष के रुप में हो रही है, लेकिन सच्चाई ये है कि जिले का एक बड़ा वर्ग उनसे खास नाराज है। आने वाले दिनों में भदौरा की तरह जिले के दूसरे जगहों पर रेलमंत्री के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट सकता है। खासतौर से जिले की मजबूत राजपूत लॉबी मनोज सिन्हा से खासी नाराज है। मनोज सिन्हा पर ये आरोप लगते रहे हैं कि मंत्री बनने के बाद उन्होंने सिर्फ स्वजातीय लोगों का ही कल्याण किया। ऐसे में दूसरी जातियों का गुस्सा लाजमी है। स्थानीय स्तर पर इस बहस को समय-समय पर हवा भी दी जाती रही है।

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