ओपी ‘रिटर्न्स’ के दावे हुए फेल तो नये डीजीपी के लिए अटकले हुई तेज, चर्चा में ऐसे भी जिनका सूची में नहीं नाम

लखनऊ। दो साल पहले जनवरी का महीना था जब तीन सप्ताह तक उत्तर प्रदेश पुलिस बगैर किसी मुखिया के रही थी। वजह, ‘ऊपर’ से ओपी सिंह का नाम तय हो गया था लेकिन सीएम योगी को वह मंजूर नहीं थे। लंबे समय तक चली खींचतान के बाद अंतत: ओपी सिंह डीजीपी तो बन गये लेकिन कार्यकाल में हुई घटनाओं को लेकर सरकार सफाई की मुद्रा में रही। जन्मतिथि के अनुसार उनका कार्यकाल आज ही पूरा हो जायेगा लेकिन पुलिस की परम्परा के मुताबिल महीने के अंतिम दिन तक वह कुर्सी पर बने रहेंगे। ऐसे में कुछ दिनों ने उन्हें सेवा विस्तार दिये जाने की चर्चाएं जोरों पर थी लेकिन ओपी सिंह ने खुद ही स्पष्ट कर दिया कि वह हटेंगे और प्रदेश पुलिस को नया मुखिया मिलेगा। इसके बाद नये नामों को लेकर चर्चा तेज हो गयी। खास यह कि इनमें ऐसे भी नाम है जिन्हें शासन चाह कर भी डीजीपी नहीं बना सकता है।

नये नियमों से विवश हुई सरकार!

गौरतलब है कि दो साल पहले सरीखी स्थिति होती तो प्रदेश का डीजीपी बनने के लिए अधिक दावेदार होते ही नहीं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि नये डीजीपी की चयन प्रदेश सरकार के बदले संघ लोक सेवा आयोग करेगा। प्रदेश सरकार सिर्फ तीन नामों की सिफारिश कर सकती है जिनमें से एक का चयन होगा। जो नाम भेजे जायेंगे उनका कार्यकार्य छह माह से अधिक होना चाहिये और वह वरिष्ठता सूची में आयेंगे। नये नामों को लेकर जो कयास चल रहे हैं उनमें से दो तिहाी तो इसी आधार पर कट जायेंगे। वरिष्ठता और कार्यकाल के अनुसार हितेन अवस्थी का नाम सबसे उपर है लेकिन वह सरकार की पसंद नहीं है। दूसरे नंबर पर आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार आते हैं लेकिन उनकी कार्यप्रणाली सरकार में बैठे कइयों को पसंद नहीं हैं। अब तीसरे नाम पर काफी दारोमदार है क्योंकि ‘सरकार’ को वह खासे पसंद है। इसमें पेंच फंस रहे हैं लेकिन सरकार को है विश्वास कि निकल आयेगी कोई ‘काट’।

तालमेल बनाने निकल पड़े कई

अभी डीजीपी का नाम तय नहीं हो सका है लेकिन सत्ता से जुड़ कर ‘डीलिंग’ करने वाले कई सफेदपोश सक्रिय हो गये हैं। इन लोगों ने अपनी तरफ से संभावित नामों से सम्पर्क साधना शुरू कर दिया है। प्रयास है कि पहले ही झटके में कई अटके काम निकल जाये। इसके साथ यभी स्पष्ट हो चुका है नये डीजीपी के संग एडीजी (एलओ) की भी नियुक्ति होगा। इसके लिए भी संभावित दावेदारों से सम्पर्क करने कई पश्चिम में कैंप कर रहे हैं। दरअसल डीजीपी के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद यही है जिसकी ‘सेटिंग’ अभी से शुरू हो गयी है।

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