सोनभद्र। एनसीएल में बिल भुगतान कराने समेत दूसरे कामों के एवज में रिश्वत का लेन-देन आम है लेकिन यह कभी सामने नहीं आता। वजह, केन्द्रीय महकमा होने के नाते राज्य में शिकायत होती नहीं और देने वाले भी भविष्य को देखते हुए हिम्मत नहीं जुटाते। बावजूूद इसके सीबीआई जबलपुर की टीम ने शनिवार की रात एनसीएल के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र पसारी के यहां पहुंची तो खलबली मच गयी। घंटों तक किसी को पता ही नहीं चला कि माजरा क्या है। बाद में स्पष्ट हुआ कि सीनियर मैनेजर महज 10 हजार रुपये रिश्वत लेते समय रंगे हाथ धराये हैं। सूत्रों की माने तो टीम ने सीनियर मैनेजर के घर से 26 लाख रुपये नकदी के अलावा डेढ़ करोड़ की चल-अचल संपत्ति से जुड़े कागजात मिले हैं। दस्तावेज बरामद किए। बाद में मैनेजर के खिलाफ कदाचार समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर किये जाने की सीबीआई के एसपी पीके पांडेय ने पुष्टि की है।

ठेकेदार से मांगा था 10 फीसदी कमीशन

बताया जाता है कि एनसीएल जयंत कोयला क्षेत्र में वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल) शैलेंद्र पसारी ने सिविल ठेकेदार केपी पाण्डेय से रिपेयरिंग का काम कराया गया था। इसके भुगतान के रुप में लगभग डेढ़ लाख रुपए बाकी था। ठेकेदार की फाइल सीनियर मैनेजर के पास इसलिये पड़ी थी क्योंकि कमीशन के रूप में मांगी रकम नहीं दी गयी थी। ठेकेदार ने हौसला जुटा कर इसकी शिकायक सीबीआई से कर दी। योजना के तहत रिश्वत की पहली किस्त 10 हजार रुपये के साथ सीनियर मैनेजर ने केपी पांडेय को अपने आफिस के बाहर बुलाया था। सीबीआई यहां इंतजार कर रही थी और सीनियर मैनेजर को रिश्वत लेते रंगे हाथ धर-दबोचा।

दो दिन चली कार्रवाई, कई और जांच जद में

सीबीआई की कार्रवाई शनिवार की रात आरम्भ हुई थी जो रविवार देर शाम तक चली। इस दौरान आरोपित को परियोजना के गेस्ट हाउस में रख कर पूछताछ की गयी। जांच के दौरान टीम के हाथ कई अहम दस्तावेज लगे हैं। माना ज रहा है कि कमीशन के खेल में कई और आला अफसर शामिल हैं। उनके नाम उजागर हो चुके हैं और जल्द ही गॉज गिरने वाली है। सीबीआई इस बाबत कुछ बोल नहीं रही है लेकिन संकेत दिये हैं कि मामला यहीं खत्म होने वाला नहीं है।

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