एक बार फिर से शुरू हुआ काम तो आकार लेने लगा पीएम मोदी का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’, विवादों के बावजूद काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में तेजी

वाराणसी। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के चलते देश में चरणबद्ध तरीके से चल रहे लॉकडाउन के कारण सभी तरह के काम पिछले दो महीनों बंद थे। काम शुरू करने के लिए जिन परियोजनाओं को पहले चरण में रखा गया था उसमें पीएम मोदीका ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर शमिल था। यहां का काम भी लॉकडाउन के चलते करीब दो महीने तक बंद था लेकिन अब इस प्रोजेक्ट का काम फिर से शुरू हो चुका है। यही कारण है कि अब प्रस्तावित कॉरिडोर का स्वरूप भी दिखने लगा है।

अगले साल तक पूरा करने का है लक्ष्य

गौरतलब है कि कतिपय संगठनों और पार्टियों के नेताओं की तरफ से मंदिर प्रशासन पर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि कॉरिडोर बनाने में कई प्राचीन मंदिरों को तोड़ा गया और मलबा गंगा नदी में गिराया गया। बावजूद इसके जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में ऐसे तमाम प्राचीन मंदिर जो लोगों के घरों में कैद थे, अब सामने देखने को मिल रहे हैं। मंदिर प्रशासन उन विग्रहों को संरक्षित करने की बात कर रहा है। पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल काशी विश्वनाथ धाम का काम अब तेजी पकड़ चुका है। इस प्रोजेक्ट को अगस्त 2021 तक पूर्ण कर जनता को समर्पित करना है। इस वजह से काम में तेजी देखने को मिल रही है। काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट की लागत 800 करोड़ रुपए अनुमानित की गई है। काशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्टर 5000 स्क्वायर फीट में बनकर तैयार हो रहा है।

सीईओ की सफाई, पहले भी अफवाह उड़ाई

मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि परिवर्तन बड़ा है, लोगों को इसमें ढलने में थोड़ा वक्त लगेगा। उन्होंने कहा, ‘पहले एक बड़ी अफवाह उड़ाई गई कि मलबा गंगा में फेंका जा रहा है। लेकिन आप देख सकते हैं, मलबा कहीं नहीं फेंका जा रहा। इसी प्रकार मंदिरों को नष्ट करने की बात कही गई लेकिन वास्तविकता यह है कि हम इन प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार कर रहे हैं।’

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