लखनऊ। मऊ सदर के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी भले दिल का दौरा पड़ने के चलते पीजीआई लाये गये थे लेकिन यहां दो दिन भी वह नहीं रह सके। अस्पताल से उन्हें डिस्चार्ज करने की भूमिका बुधवार को ही बन चुकी थी। गुरूवार को इसे अमली जामा पहनाया जाने लगा तो बड़ी संख्या में मौजूद मुख्तार के समर्थक भड़क गये। मुख्तार के जाते समय समर्थक नारेबाजी करने लगे। माहौल तनावपूर्व होते देख पुलिस ने लाठी पटक कर खदेड़ दिया। इस दौरान एंबुलेंस को रोकने की खातिर एक ने कोशिश की तो उसको पकड़कर पुलिस ने जीप में बैठा लिया। सीओ मोहनलालगंज आरके शुक्ला के नेतृत्व में टीम बार्डर तक छोड़ने गयी। इसके अलावा पुलिस ने समूचे रास्ते के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये थे जिसका नतीजा था कि साथ चलने वाले वाहन भी दूरी बनाये थे।

अब्बास ने केन्द्रीय मंत्री पर लगाये आरोप

मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी ने जहां एक तरफ तो सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ की तो वहीं दूसरी तरफ केन्द्र के कुछ मंत्रियो पर आरोप भी लगाये। अब्बास ने भले नाम नहीं लिया लेकिन इशारा किसकी तरफ था सब जान रहे थे। अब्बास का आरोप पीजीआई अस्पताल कुछ मंत्रियो के दबाव में आ गया। इन मंत्रियों ने फोन कर फौरन ही डिस्चार्ज करने का फरमान सुनाया था। हर कोई जान रहा कि दिल का दौरा पड़ने के बाद गड्ढे वाली सड़कों पर लंबा सफर कर पीजीआई पहुंचे थे। खासी कमजोरी थी और एंजियोग्राफी के बाद कम से कम 60 घंटे तो मरीज को आराम करने की सलाह दी ही जाती है।

एंबुलेंस में डाक्टर तो दूर कंपाउडर तक नहीं

अब्बास का यह भी आरोप था कि जिस एंबुलेंस से बांदा भेजा गया उसमें डाक्टर तो दूर कंपाउंडर तक नहीं था। वह खुद साथ जाना चाहते थे लेकिन सुरक्षा का वास्ता देते हुए इसकी इजाजत नहीं दी गयी। एक पिता को उसके पुत्र से क्या खतरा हो सकता है यह तो पुलिस ही बता सकती है। पिता ने पहले भी विधानसभा में जान के खतरे का अंदेशा जताते हुए प्रार्थनापत्र दिया था जो इस घटनाक्रम के बाद सबके सामने आ गया है।

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