‘लाट साहब’ ही नहीं दूसरे दिग्गजों की भी प्रतिष्ठा लगी दांव पर, ‘कत्ल की रात’ सोशल मीडिया पर चलता रहा प्रचार

मऊ। यूं तो सोमवार को प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है लेकिन घोसी का मामला सबसे अलग है। यहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतने वाले फागू चौहान के बिहार के राज्यपाल बनने से सीट रिक्त हुई है। खास यह कि पिछली बार कांटे की टक्कर में दूसरे नंबर पर रहने वाले मऊ सदर के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास को बसपा ने टिकट नहीं दिया है। हमेशा की तरह जातीय गोलबंदी दिखने लगी है लेकिन अंतिम समय सोशल मीडिया पर चल रहे संदेशों से अपने पक्ष में माहौल को करने की कवायद चल रही है। घोसी सीट पर कुल 11 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा के विजय राजभर, सपा समर्थित सुधाकर सिंह, बसपा के अब्दुल कय्यूम अंसारी प्रमुख हैं।

क्षत्रपों’ के दावों की होनी है परीक्षा

गौरतलब है कि चुनाव मैदान में सपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने वाले सुधाकर सिंह तकनीकी कारणों से अंतिम समय निर्दल घोषित हो गये। उनके पक्ष में लामबंदी तो तगड़ी हुई लेकिन साइकिल के बदले ‘चाबी’ समझाने में जो समस्या आयी उससे अंतिम दिन तक नहीं उबरा जा सका। बावजूद इसके भाजपा के वोटबैैंक में उन्होंने करारी सेंध लगायी है। अब कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही से लेकर उपेन्द्र तिवारी तक ‘बिरादरी’ को कितना साधने में सफल होते हैं और योगी का क्या असर होता है देखना बाकी है। कुछ यही स्थिति बसपा की भी रही जिसके सांसद अतुल राय के जेल में होने और अंसारी परिवार की उदासीनता साफ खलती दिखी।

पोलिंग पार्टियां पहुंची बूथों तक

शांतिपूर्वक चुनाव सम्पन्न कराने की खातिर न सिर्फ बड़ी संख्या में फोर्स की तैनाती की गयी है बल्कि सीसी कैमरों से लेकर निगरानी के दूसरे प्रबंध भी किये गये हैं। रविवार को चुनाव में लगाये गये 2101 मतदान कर्मचारियों, उनको ईवीएम एवं अन्य सामग्री देने, उपस्थिति दर्ज करने और ड्यूटी बताने एवं समस्या हल करने के लिए नियुक्त 150 कर्मचारियों एवं दर्जनों अधिकारियों की फौज जुटी थी। शाम से पहले सभी पोलिंग पार्टियां अपने बूथों पर पहुंच चुकी थी।

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