गोरखपुर। देश के 21 राज्यों की सत्ता तक पहुंच चुकी भाजपा में पीएम मोदी ही स्टार प्रचारक हैं। उनके बाद इन दिनों किसी की डिमांड होती है तो वह यूपी के सीएम योगी है। चुनाव गुजरात का हो या कर्नाटक मोदी की अनुपलब्धता पर फौरन योगी को बुलाया जाता है। ताजा मामला त्रिपुरा का है जहां पिछले चुनाव में खाता न खोल पाने वाली भाजपा को दो तिहाई बहुमत मिला है। जानकार इसे योगी का करिश्मा मान रहे हैं। वजह, त्रिपुरा की एक तिहाई आबादी नाथ संप्रदाय से जुड़ी है जिसका मंदिर गोरखपुर है और महंत योगी आदित्यनाथ हैं। त्रिपुरा में योगी ने जिन 7 स्थानों में जनसभा की थी उसमें से 5 में भाजपा को भारी विजय मिली है।

बंगाल से आकर त्रिपुरा बसा था नाथ संप्रदाय

जानकारों का कहना है कि पहले नाथ संप्रदाय से जुड़े लोग पश्चिम बंगाल में रहते थे लेकिन वाम शासन काल में त्रस्त होकर वह उड़ीसा में बस गये। यहां की कुल आबादी का एक तिहाई हिस्सा नाथ संप्रदाय को मानने वाला है और उनके लिए योगी किसी भगवान से कम नहीं हैं। योगी के प्रचार का नतीजा था कि हर बार चुनाव से उदासीन रहने वाले इस संप्रदाय से जुड़े लोग खुलकर भाजपा के साथ आये। यही नहीं इस बार रिकार्ड पोलिंग का कारण भी इनकी सक्रियता थी। भाजपा ने उन्हें समयाभाव के चलते सात स्थानों पर ही भेजा जबकि डिमांड दो दर्जन से अधिक स्थानों पर थी।

गुजरात में जहां गये जीत दिलायी

इससे पहले गुजरात विधानसभा चुनाव जहां कांटे की टक्कर में कांग्रेस को जीत का भरोसा था वहां भी योगी ने परिणाम पलट दिये। सूरत, बडोदरा, अहमदाबाद समेत जिन स्थानों पर उनकी सभाएं हुई वहां भाजपा को बड़ी जीत मिली। कर्नाटक में भी पीएम मोदी की तरह सर्वाधिक डिमांड योगी की हो रही है। माना जा रहा है कि वहां के चुनाव में भी ‘बाबा’ अपना असर छोड़ेंगे।

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