गाजीपुर। चुनाव निकाय का हो या लोकसभा का। राजनेता हर स्थान पर दिखते हैं और इसका प्रचार प्रसार भी करने मं कोई कमी नहीं छोड़ते। इससे खुछ अलग मिट्टी के बने हैं केन्द्रीय संचार और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा। सोमवार की सुबह अफीम कारखाने के सामने एक चाय के ठेले पर मनोज सिन्हा को देख सैकड़ों की भीड़ जुटने लगी। प्रोटोकाल छोड़कर मंत्री एक ऐसी बिटिया की हौसलाअफजाई और इच्छा पूरी करने के लिए पहुंचे थे अक्षम माता-पिता के सपनों को पूरा करने की खातिर ग्रेजुएट होकर भी चाय का ठेला लगाती है। छोटे भाईयों को पढ़ाने के संग बीटीसी में इंट्रेंस की तैयारी कर रही है। भोर में चार बजे से रात तक जूझने वाली आरती गुप्ता को मनोज सिन्हा ने की तरफ से 40 हजार की छात्रवृत्ति मिली थी लेकिन उसकी इच्छा जानकर वह खुद को वहां जाने से नहीं रोक सके।

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वजीफा मिलने पर जतायी थी ठेले पर आने की इच्छा

मनोज सिन्हा के निजी सचिव सिद्धार्थ राय को आरती के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसकी चर्चा मंत्रीजी से की। पिछले 21 सितंबर को आयोजित प्रकाशोत्सव में रेलमंत्री ने अपनी ओर से आरती को 40 हजार रुपये की छत्रवृत्ति दी। इस पर प्रफुल्लित आरती ने इच्छा जतायी कि एक बार मंत्रीजी उसके ठेले पर भी चाय पिये। इसकी जानकारी मिलने पर ठेले पर पहुंचकर मनोज सिन्हा ने सिर्फ आरती का हालचाल ही नहीं लिया बल्कि उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा। साथ ही भरोसा दिलाया कि परेशान न हो। उसकी आगे की पढ़ाई को लेकर वह खुद चिंतित हैं और बीटीसी में एडमिशन कराएंगे।

भोर से रात तक जूझती है बिटिया

नवापुरा मुहल्ले की रहने वाली आरती के पिता मराछु गुप्त का पांव टूट गया है जबकि मां रोगग्रस्त हैं। जुड़वा भाई लव-कुश को आरती अपने दम पर केंद्रीय विद्यालय में पढ़ा रही है। सुबह छह बजे ठेला लेकर आरती अफीम कारखाने के पास आ जाती है और शाम तक चाय बेचती है। घर लौट बर्तन साफ करने से लेकर भोजन बनाने के पढ़ाई करती है। परिवार के संग भोजन होता है लेकिन भोर में चार बजे उठ कर फिर से पढ़ाई करती है। इसके बाद दुकान लगाने की तैयारी में जुट जाती है। बावजूद इसके सहजानंद कॉलेज से बी कॉम की डिग्री लेकर आरती अब बीटीसी करना चाहती है।

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