वाराणसी। पीएम के संसदीय क्षेत्र काशी में चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के निर्माण कार्य में अपेंक्षित तेजी लाये जाने की खातिर प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री से लेकर आला अफसर जुटे थे। सभी का पूरा जोर था कि हर हाल में काम को अक्टूबर तक पूरा करना है। एक तरफ तो अक्टूबर तक हर हालात में पूरा कराये जाने का निर्देश था तो दूसरी तरफ आधा काम भी पूरा नहीं हो सका है। दशा यह थी कि फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान 277 वीम में से 165 वीम का लांचित कार्य शेष था। निर्माण एजेंसी इसके लिए चालू यातायात को बता रह थी। इसके कारण कार्य में आ रही परेशानी की जानकारी कमिश्नर दीपक अग्रवाल को भी दी गयी थी। कमिश्नर ने सोमवार को विकास कार्यो की मण्डलीय समीक्षा बैठक में रूट डाइवर्जन प्लान दो दिन के अन्दर तैयार कर उपलब्ध कराये जाने हेतु सेतु निगम के अभियन्ता को निर्देशित किया। प्लान दिया जाता इससे पहले ही हादसा हो गया जिसकी आशंका जतायी जा रही थी।

गुणवत्ता पर उठ रहे थे सवाल

उत्तर प्रदेश सेतु निगम को 7741.47 लाख की लागत से इस फ्लाईओवर बनाने का काम सपा शासन काल में दिया गया था। निर्माण आरम्भ होने के बाद से ही निगम पर घटिया निर्माण सामग्री लगाने का आरोप भी लगता रहा। कैंट स्टेशन के सामने से होकर गुजरने वाले इस फ्लाईओवर के लिए पर लंबे समय से निर्माण कार्य चल रहा था लेकिन हाल जस के तस थे। पिछले दिनों उम मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यहां का दौरा किया था जबकि कमिश्नर से लेकर डीएम कई बार निरीक्षण कर निर्माण कार्य जल्द पूरा करने का निर्देश देते रहे हैं। पुल का निर्माण इसी साल अक्टूबर के दबाव में जहां एक तरफ काम जल्दबाजी में जैसे-तैसे निपटाया जा रहा था वहीं गुणवत्ता और मानकों का ध्यान भी नहीं रखा गया था।

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