वाराणसी। पूरे देश में वीआईपी कल्चर को लेकर मुहिम छिड़ी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे बढ़कर वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए कानून बनाया। लेकिन गाजीपुर के एआरटीओ विनय कुमार अब भी वीआईपी कल्चर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। खुद को किसी लाट साहब की तरह समझने वाले इस अधिकारी को शान में थोड़ी भी गुस्ताखी मंजूर नहीं है। तभी तो ऑफिस के सामने बनी सड़क पर ताला लगा दिया। ये रास्ता तभी खुलता है जब साहब की गाड़ी आती-जाती है।

सड़क पर लगाया ताला

भुतहिया ताड़ स्थित परिवहन विभाग के दफ्तर और मुख्य सड़क को जोड़ने वाले रास्ते का निर्माण जिला पंचायत की ओर से कराया गया है। मुख्य सड़क और ऑफिस के बीच की दूरी लगभग 40 मीटर है। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले इस रास्ते पर बैरिकेडिंग कर ताला लगा दिया गया। इस बीच मुख्य सड़क से ऑफिस के बीच कोई वाहन नहीं जा सकता है। खबर के मुताबिक एआरटीओ प्रशासन विनय कुमार के आदेश पर सड़क पर तालाबंदी की गई। इस रास्ते पर सिर्फ और सिर्फ एआरटीओ विनय कुमार की गाड़ी ही आती-जाती है। आलम ये है कि ताले की चाबी भी एआरटीओ के वाहन चालक के पास रहती है। ऐसे में विभाग में आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोग या तो मुख्य सड़क के किनारे गाड़ी खड़ी करते हैं या फिर कहीं दूर खाली जगह पर गाड़ी पार्क करते हैं।

सुर्खियों में रहते हैं एआरटीओ विनय कुमार

दरअसल पूर्वांचल में परिवहन विभाग को सबसे मलाईदार विभाग के तौर पर पहचाना जाता है। विभाग में भ्रष्टाचार का खेल किसी से छुपा नहीं है। विभाग के अधिकारी खुद को डीएम और पुलिस कप्तान से भी ऊपर समझते हैं। निलंबित एआरटीओ आरएस यादव सरीखे अधिकारी इसकी मिसाल है। बताया जा रहा है कि गाजीपुर के परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी बेकाबू हैं। काम चाहे छोटा हो या फिर बड़ा, बगैर घूस के आप उम्मीद ना करिए।

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