निषाद को साध भाजपा ने पायी बड़ी ‘राहत’, अखिलेश को जल्द ही लग सकता है एक और बड़ा झटका!

लखनऊ। लोकसभा चुनावों के पहले चरण की वोटिंग से पहले निषाद पार्टी को अपने पाले में कर भाजपा ने समाजवादी पार्टी को करारा झटका दिया है। दरअसल निषाद पार्टी सिर्फ गोरखपुर तक सीमित नहीं है बल्कि प्रदेश की दो दर्जन से अधिक सीटों पर इस समुदाय की आबादी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। चर्चा भले गोरखपुर उपचुनावों की होगी हो लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में ज्ञानपुर की सीट निषाद पार्टी ने जीती थी जबकि जौनपुर के मल्हनी में दूसरे नंबर पर थी। भदोही,मीरजापुर,चंदौली,गाजीपुर,बलिया से लेकर गोरखपुर के आसपास के इलाकों में निषाद,बिंद, मल्लाह समेत दूसरी उपजातियों को जोड़कर डा. संजय निषाद ने जमीनी स्तर पर जो संगठन खड़ा कर लिया है वह किसी सूरत में ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा से कम नहीं है। चर्चाओं की माने तो एक और ‘सहयोगी’ सपा को झटका देने की तैयारी में है।

विलय से हटे पीछे, आये एनडीए में सीधे

इसकी पटकथा काफी दिनों से लिखी जा रही थी। दरअसल गोरखपुर उनचुनाव में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद के पुत्र प्रवीण ने सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा था लेकिन तय हुआ था कि अगला चुनाव अपने चिन्ह भोजन भरी थाली पर लड़ेंगे। इससे इनकार कर सपा ने साइकिल से लड़ने पर जोर दिया जिसके बाद रिश्तों में खटास आने लगी। पहले प्रयास किया गया कि निषाद पार्टी का भाजपा में विलय होगा लेकिन भाजपा नेताओं को बता दिया गया कि सपा तो इसके लिए पहले से तैयार है। बाद में तय हुआ कि निषाद पार्टी अब एनडीए गठबंधन में सहयोगी बनेगी। खास यह कि इस समुदाय की फूलन देवी को मुलायम सिंह राजनीति में लाये थे लेकिन उनके पुत्र अखिलेश कुछ माह भी अपने सांसद को रोक नहीं सके।

अब प्रवीण बने भाजपाई

ताजा घटनाक्रम के बाद गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता हासिल की है। माना जा रहा है कि भाजपा प्रवीण गोरखपुर सीट से लोकसभा चुनाव में उतार सकती है। निषाद पार्टी के संस्थापक संजय निषाद ने कहा कि रामराज और निषाद राज अब एक साथ हैं। प्रवीण निषाद के भाजपा में शामिल होने से पूर्वांचल की राजनीति में खासा प्रभाव पड़ेगा साथ ही मध्य प्रदेश से लेकर दूसरे प्रांतों में भी असर दिखेगा।

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