वाराणसी। मानवाधिकार कार्यकर्ता और पीवीसीएचआर के निदेशक डा. लेनिन पर पांच साल पहले हुए प्राणघातक हमले के मामले में कार्रवाई न होने को एनएचआरसी ने गंभीरता से लिया है। एनएचआरसी ने एसएसपी वाराणसी को समन जारी करते हुए उन्हें व्यक्तिगत तौर पर दो माह के भीतर आयोग के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि मामले में हुई देरी को लेकर एसएसपी 20 फरवरी को आयोग के समक्ष पुलिस का पक्ष रखेगें। गौरतलब है कि इससे पहले भी एनएचआरसी ने इस प्रकरण में प्रगति रिपोर्ट पुलिस से मांगी थी जिसे न देने पर सख्त रुख अख्तियार किया है।

लंबे समय से मानवाधिकार उल्लघन के मामले उठाते हैं लेलिन

गौरतलब है कि डा. लेनिन एनएचआरसी के एनजीओ कोर कमेटी के सदस्य रहे हंै और उन्होंने आयोग में कई मामलों को देश भर से मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए दायर किया है। पांच साल पहले उन पर हुए जानलेवा हमले का शिकायत आयोग से की गयी थी। अरसा बीत जाने के बावजूद पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने पिछले साल अक्टूबर में ही एसएसपी बनारस से प्रगति रिपोर्ट मंगी थी जो अब तक नहीं भेजी गयी है। आयोग ने अप्रैल में रिमाइंडर भी ङेजा था लेकिन उस पर भी कुछ नहीं हुआ। डा. लेनिन को बुला कर बयान जैसी औपचारिक कार्रवाई भी नहीं की गयी।

पुलिस के रवैये पर आयोग सख्त

मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को लेकर एसएसपी वाराणसी के रवैये को गंभीरता से लिया है। पीएचआर अधिनियम 1993 की धारा 13 के तहत सम्मन को एसएसपी वाराणसी को जारी किया है। आयोग ने 20 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया जिससे वर्ष 2012 के बाद से अपने स्पष्ट आकस्मिक और कठोर दृष्टिकोण को स्पष्ट किया जा सके। यहीं नहीं इस मामले की रिपोर्ट निर्धारित तिथि से एक हफ्ते पहले भेजने के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने की हिदायत दी गयी है।

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