न मजबूर थे न ही लाचार, मदद के नाम पर लोगों को शिकार बनाने वाले चढ़े पुलिस के हाथ

वाराणसी। पिछले कुछ दिनों से जिले में टप्पेबाजी की वारदातें बढ़ती जा रही थी। बैंकों से पैसा निकालनेवाले शिकार बन रहे थे। एसएसपी ने इनकी गिरफ्तारी का टास्क क्राइम ब्रांच को सौंपा था। प्रभारी विक्रम सिंह को सूचना मिली कि शुक्रवार को गिरोह शास्त्रीपुल (रामनगर) में जुुटने वाला है। इस पर इंस्पेक्टर अनूप कुमार शुक्ला के साथ छापेमारी में गिरोह से जुड़े आधा दर्जन सदस्यों को धर-दबोचा। इनसे पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारियां मिली है। गिरोह सिर्फ काशी या पूर्वांचल ही नहीं बल्कि एमपी,झारखंड,बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक वारदातों को अंजाम दे चुका है।

अलग-अगल कमरा लेकर रहते थे

गिरफ्तार टप्पेबाजों में एक को छोड़ सभी गोंडा के रहने वाले हैं। यह मजदूर का कारीगर के रूप में अलग-अलग कमरे लेकर रहते थे जिससे किसी को शक न हो। बैंको के आसपास यह मंडराते थे और मदद के बहाने अपने शिकार से मेलजोल बढ़ाते थे। बाहर मौजूद अपने साथी को शिकार का ब्योरा देते और पलक झपकते उनकी जमा-पूंजी उड़ा देते। पिछले कुछ दिनों में इन्होंने कई वारदातों को अंजाम देना कबूल किया है। एक शहर में अधिक दिन गिरोह नहीं ठहरता था औ्र इसके बाद दूसरे स्थान पर निकल जाता। मिली रकम को साथी के जरिये घर भिजवा देते थे।

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