स्कूलों तक वेदों का ज्ञान ले जाने की जरूरत, वैदिक गणित सांस्कृतिक धरोहर: प्रो. हंसधर झा

वाराणसी। वेदों का विज्ञान स्कूल स्तर पर जाना चाहिये। वैदिक-गणित केवल गणित ही नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर भी है। इसे सजो कर रखना हमारा पावन कर्तव्य बनता है क्योंकि वैदिक गणित का अनुसरण कर अन्त:प्रज्ञा से उच्चस्तरीय यथार्थ ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इसमें यह प्रदर्शित किया गया है कि प्राचीन भारतीय पद्धति एवं उसकी गुप्त प्रक्रियाएँ गणित की विभिन्न समस्याओं को हल करने की क्षमता रखती हैं। जिस ब्रह्माण्ड में हम रहते हैं उसकी रचना गणितमूलक है तथा गणितीय माप और संबंधों में व्यक्त नियमों का अनुसरण करती है। केन्द्रीय संस्कृत संस्थान भोपाल के ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. हंसधर झा ने बीएचयू ज्योतिष विभाग द्वारा आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (आनलाइन वेबिनार) में अंतिम सत्र में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में यह बाते कही।

मौजूदा महामारी पृथ्वी का आक्रंदन

केन्द्रीय संस्कृत संस्थान जम्मू के निदेशक प्रो. वासुदेव शर्मा ने कहा कि लोभ, नास्तिकता, झूठ , अधर्म, व अनाचार बढ़ने से उत्पात होते हैं। श्रीलालबहादुर केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ दिल्ली के प्रो. प्रेमकुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान में पृथ्वी पर इतना पापाचार बढ़ गया, लोग जिन्दा जानवर तक खाने लगे। इससे माता पृथ्वी व्यथित हो गई। ये महामारी कोई और नही माता पृथ्वी का आक्रन्दन है जो इस आंशिक प्रलय में जहर बनकर महामारी स्वरुपिणी महाकाली ही सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए प्रो. चन्द्रमा पाण्डेय ने कहा कि इस समय सम्पूर्ण विश्व को चाहिए कि सदाचार का पालन करते हुए अपनी-अपनी उपासना पद्धति को अपना कर इस महामारी से निजात पा सकते हैं।

सस्ती लोकप्रियता पाने वाले कर रहे मनमानी वाख्या

धन्यवाद ज्ञापन देते हुए ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि समग्र विश्व में जिस समय विज्ञान एवं उसके उपविषय विभाग विकसित नहीं थे उस समय भी गणित, अंतरिक्ष, भूगोल, भूगर्भ, मौसम, तथा कृषि विज्ञान आदि के मूल ज्योतिषशास्त्र में ही विद्यमान थे तथा यहीं से पल्लवित और पुष्पित होकर अपने वर्तमान स्वरूप को प्राप्त किए हैं। परंतु दुर्भाग्य वश धीरे-धीरे तथा उसमें आगम और सिद्धांत विहीन चिंतन का प्रभाव बढ़ते हुए आज विकृति के चरम तक पहुंच गया है। तथाकथित कुछ लोग अत्यंत संवेदनशील विषयों पर भी सस्ती लोकप्रियता हेतु आधार एवं सिद्धांतहीन अपनी तर्कशक्ति द्वारा मनमानी व्याख्या करते हुए ज्योतिष, धर्म, संस्कृति, सभ्यता एवं समाज आदि के सभी पक्षों को कलुषित कर रहे हैं; जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण कोरोना जैसी वैश्विक महामारी एवं इससे सम्बन्धित अन्य विषयों में भी दृष्टिगत हो रहा है’ लोग स्वेच्छा से अप्रमाणिक कोरोना जैसी महामारी के सन्दर्भ में भविष्यवाणी कर ज्योतिष शास्त्र के स्वरूप पर हानि पहुँचा रहे हैं। प्रो. पाण्डेय ने कई प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान भी किया। कार्यक्रम का संचालन डा. सुभाष पाण्डेय जी ने, स्वागत भाषण प्रो. रामजीवन मिश्र ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रो.रामचन्द्र पाण्डेय, प्रो. चन्द्रमौली उपाध्याय, प्रो. भारतभूषण मिश्र, डा. निर्भय पाण्डेय, डा. उपेन्द्र भार्गव, डा. कृष्णकुमार, डा. राजा पाठक आदि उपस्थित रहे। वेबिनार में 400 से अधिक ज्योतिषशास्त्री, चिन्तक आदि नें हिस्सा लिया।

Related posts