मऊ। जिले की राजनीति इन दिनों दो युवराजों के इर्द-गिर्द घूम रही है। अब तक मऊ की पॉलिटिक्स के ‘प्लेब्वॉय’ रहे अब्बास अंसारी को चुनौती देने के लिए एक और युवा मैदान में उतर आया है। नाम है नेदा फारूक। अब सवाल इस बात का है कि नेदा फारूक आखिर कौन हैं, जो बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे को चुनौती दे रहे हैं। दरअसल नेदा फारूख मऊ नगर पालिका के चेयरमैन पद के तगड़े दावेदारों में से एक अरशद जमाल के बेटे हैं। मऊ नगर पालिका में अपने पिता की बादशाहत को बरकरार रखने के लिए वह मैदान में उतर आए हैं।

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नेदा ने संभाली चुनाव प्रचार की कमान

निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच नेदा फारूक के चर्चे तेजी से हो रहे हैं। जिले की राजनीति में कुछ लोग उन्हें अब्बास के मुकाबले खड़ा देख रहे हैं। हालांकि अब्बास के मुकाबले नेदा की सक्रियता कम है। लेकिन निकाय चुनाव में नेदा ने अपने पिता की जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। नेदा ने खासतौर से युवा ब्रिगेड को जोड़ने की मुहिम छेड़ी है। इस काम में वो काफी हद तक कामयाब भी दिख रहे हैं। अपने पिता से अलग, उनका प्रचार का तरीका भी कुछ नया है। चुनाव जोड़तोड़ के बजाय, वह पूरी साफगोई से लोगों से मिलते हैं। चेहरे पर मायूसियत भरी मुस्कान लिए वह जनता के बीच अपने पिता के लिए जीत की दुआ करते हैं। उन्होंने युवाओं की एक ऐसी टीम तैयार कर रखी है जो चुनावी मैदान से लेकर सोशल साइट्स की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। नेदा खुद सड़कों की खाक छान रहे हैं। उनका अंदाज भी काफी कुछ अब्बास सरीखा है।

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट रहे हैं नेदा

अब्बास अगर शूटिंग के बेहतरीन खिलाड़ी है तो नेदा भी उनसे कम नहीं है। नेदा पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। बचपन मऊ में बीता लेकिन आगे की तालीम उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरी की। इंग्लिश ऑनर्स से ग्रेजुएश कर चुके नेदा के सामने नौकरी के कई ऑफर आए लेकिन उन्होंने अपने पिता के पुश्तैनी कारोबार को संभाला। नेदा इन दिनों अपने पिता के लिए सियासी मैदान में पूरा जोर लगाए हुए हैं। समाजवादी पार्टी के अंदर भी लोग उन्हें उभरता हुआ सितारा बता रहे हैं। अभी तक उन्होंने सियासत में पूरी तरह कदम नहीं रखा है, लेकिन जिस अंदाज में उनकी सक्रियता दिख रही है, उससे संकेत साफ हैं। नेदा भले ही राजनीतिज्ञ ना हो लेकिन उनका सियासी विजन बहुतों से बेहतर है। अमृत प्रभात डॉट कॉम से बातचीत में उन्होंने कई मसलों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि पिछले पांच सालों में अपनी अम्मी के द्वारा किए गए कामों को लेकर वह जनता के बीच जा रहे हैं। लोगों के सामने अम्मी के कार्यकाल लेखा-जोखा पेश करने के साथ अपना विजन भी बता रहे हैं। खासतौर से युवाओं को शिक्षित करना उनका प्रमुख मकसद है।

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जब अब्बास और नेदा का हुआ आमना-सामना

अपने पिता की तरह अंसारी परिवार से उनका छत्तीस का आंकड़ा नहीं है। खासतौर से अब्बास अंसारी को लेकर। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सियासी तौर पर उनके पिता और मुख्तार अंसारी में भले ही मतभेद रहे हो लेकिन उनका इससे कोई वास्ता नहीं रहा। अब्बास अंसारी को वो अपना प्रतिद्वंदी नहीं मानते और ना ही किसी तरह की सियासी रंजिश रखते हैं। उनके मुताबिक लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने की आजादी है। अब्बास से मुलाकात के सवाल पर नेदा बताते हैं कि एक खेल प्रतियोगिता के उद्धघाटन के मौके पर उनसे मुलाकात हुई थी। थोड़ी बहुत बातचीत भी हुई।

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