लखनऊ। मुन्ना बजरंगी पूर्वांचल ही नहीं बल्कि देश के उन चुनिंदा अपराधियों में था जिन्हें प्रदेश पुलिस कभी पकड़ नहीं पायी। एक बार दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में चमत्कारिक ढंग से बचने के एक दशक बाद बजरंगी मुंबई में गिरफ्तार हो गया। आखिरी तीन साल बजरंगी ने भले पुराने ‘नाम’ पर ‘दाम’ कमाया हो लेकिन अंदर से पूरी तरह से खोखला हो गया था। इसका प्रमाण उसके अत्यंत करीबी रिश्तेदार और बाहर के लिए चेहरा बने पुष्पजीत उर्फ पीजे की हत्या थी। पीजे को साथी समेत गोलियों से छलनी कर दिया गया और बजरंगी मरते दम तक यह नहीं जान पाया कि वारदात को अंजाम देने वाले कौन थे। रही सही कसर पीजे के बाद कमान संभालने वाले तारिक के हत्या से पूरी हो गयी। इसका रहस्य जानने से पहले बजरंगी अपने गुर्गों की तर्ज पर दुनिया से विदा ले लिया।

करीबी छोड़ चुके थे साथ, ‘मैनेजर’ किये निराश

सूत्रों की माने तो पूर्वांचल में पहली बार एके 47 सरीखे असलहे के प्रयोग से लेकर विधायक कृष्णानंद समेत सात लोगों की हत्या को अंजाम देने वाले मुन्ना बजरंगी के करीबी उसका साथ छोड़ चुके थे। जिन लोगों ने उसे ‘बजरंगी’ बनाया था वह मुंह मोड लिये तो ‘मैनेजरों’ की बन आयी। इन लोगों ने बजरंगी के नाम पर भले ही करोड़ों की उगाही कर ली हो लेकिन वह किसी वारदात को अंजाम देना तो दूर करने वाले तक का पता लगाने में विफल रहे। बजरंगी को इसका आभास था लेकिन फौरी तौर पर विकल्प न होने के चलते उसने मान रखा था कि ‘नाम’ चलता रहेगा और मैनेज कर लूंगा। अति आत्मविश्वास उसके खात्मे का कारण बन गया।

खोखे से लेकर फोटो तक बने रहस्य

बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के बाद बरामद 10 खोखों की जांच से पता चला है कि यह अलग-अलग असलहों के हैं। ऐसे में वारदात को अंजाम देने की खातिर कई असलहों के प्रयोग करने की आशंका जताई जा रही है। इके अलावा घटना के बाद वायरल हुई फोटो ने भी कई सवाल खड़े किये हैं। पुलिस-प्रशासन के संग जेल ने भी कई बार सघन तलाशी अभियान चलाया है लेकिन कोई एंड्रायड मोबाइल नहीं मिला है। ऐसे में बायरल हो रही दो फोटोग्राफ पर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह फोटोशॉप का नमूना तो नहीं?

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