लखनऊ। भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत साल लोगों की हत्या समेत दर्जनों संगीन मामलों के आरोपित पूर्वांचल के कुख्यात माफिया डॉन प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी सोमवार की अल सुबह बागपत जेल में मारा गया। बजरंगी की आज स्थानीय अदालत में पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के मामले में पेशी होनी थी। बजरंगी को रविवार की रात झांसी जेल से बागपत लाया गया था। जेल में आने के कुछ घंटों के बाद ही कई गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गयी। वारदात से पूर्वांचल के अपराध जगत में खलबली मच गयी हैै। रेलवे समेत दूसरे सरकारी ठेकों, रियल स्टेट, शराब के कारोबार से लेकर दूसरे धंधों में बजरंगी की सीधी दखल थी। गिरोह से जुड़े लोग वारदात की जानकारी मिलने के बाद या तो बागपत के लिए रवाना हो गये हैं या अपने सम्पर्को के जरिये जानकारी जुटा रहे हैं।

सात लाख का रह चुका था इनामी

मुन्ना बजरंगी उन गिने-चुने अपराधियों में था जिस पर सीबीआई और पुलिस की तरफ से सात लाख का पुरस्कार रह चुका था। भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में सीबीआई ने बजरंगी पर पांच लाख का पुरस्कार घोषित किया था। इसके अलावा भी कई मामलों में उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ को बजरंगी की तलाश थी जिसके चलते प्रदेश पुलिस की तरफ से बजरंगी पर दो लाख का इनाम घोषित किया गया था। खास यह कि प्रदेश पुलिस से लेकर सीबीआई तक बजरंगी को ढूंढती रह गयी लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 29 अक्टूबर 2009 को मुंबई के मलाड इलाके से नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया था। कुछ माह पहले इसी सेल ने प्रतिद्वंदी गुट के माफिया बृजेश सिंह की भी इसी तरह से गिरफ्तारी भुनेश्वर (उड़ीसा) में की थी।

अधूरी रह गयी ‘माननीय’ बनने की ख्वायिश

किसी जमाने में आका रह चुके मुख्तार अंसारी की तरह मुन्ना बजरंगी की भी इच्छा थी कि वह सांसद या विधायक बने। जेल में रहते हुए बजरंगी ने 2012 के विधानसभा चुनाव में मडियाहूं से चुनाव भी लड़ा था लेकिन जमानत भी नहीं बची। पिछले विधानसभा चुनाव में बजरंगी ने राजनैतिक सम्पर्को के जरिये पूरा प्रयास किया था कि किसी बड़े दल से टिकट मिल जाये। इस बार वह खुद मैदान में नहीं उतर रहा था बल्कि पत्नी सीमा सिंह को चुनाव लड़वा रहा था। अपना दल (कृष्णा गुट) से टिकट मिला लेकिन परिणाम पूर्ववत ही रहा। सीमा सिंह की भी जमानत जब्त हो गयी।

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