वाराणसी। गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हमले पिछले सप्ताह एक वारदात के बाद शुरू हुए हैं लेकिन काफी समय से इसकी तैयारी हो रही थी। सूत्रों की माने तो आरोपों के दायरे में आने वाले कांग्रेस के विधायक अल्पेश ठाकोर के एक करीबी विधायक ने दो माह पहले इसके रियेक्शन के पहलुओं पर करीबियों के संग ‘मंत्रणा’ की थी। बताया जाता है कि गुजरात की हार को अल्पेश और उनके करीबी पचा नहीं पा रहे थे। चर्चा यहां तक हुई थी कि जिन क्षेत्रों अहमदाबाद, सूरत, बड़ोदरा समेत जिन इलाकों में बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय रहते हैं वहां मिली पराजय के चलते सरकार नहीं बना सके। समूचे घटनाक्रम का शर्मनाक पहलू यह रहा कि ‘विधायक’ ब्लू प्रिंट तैयार कर चले गये तब जाकर खुफिया विभाग को इसका अभास हुआ। अब नये सिरे से उनके साथ रहे लोगों से पड़ताल की जा रही है।

ब्लू प्रिंट था तैयार, मौके का इंतजार

सूत्रों की माने तो गुजरात विधानभा चुनाव के पहले दोनों विधायकों ने अपने संग पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को भी साथ शामिल किया था। खुल कर नहीं लेकिन अंदरखाने में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए पूरी तैयारी की थी। सब कुछ तयशुदा योजना के मुताबिक चला लेकिन पंच फंसा दिया उत्तर भारतीयों ने। पूरे गुजरात में इस गठबंंधन की प्लानिंग के अनुसार सब हुआ लेकिन जहां उत्तर भारतीयों की संख्या अधिक थी वहां मिली जीत ने सरकार बनाने से रोक दिया। इसके बाद उन्हें सबक सिखाने के लिए प्लान तैयार हुए लेकिन इसे क्रियांवित करने से पहले दौरा कर सभी पहलू टटोले गये। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि योगी विरोधियों ने आकर न सिर्फ मुलाकात की बल्कि बताया कि रियेक्शन कुछ नहीं होगा। अलबत्ता इसे कैश कर यहां भी माहौल बना लिया जायेगा।

प्रेस नोट वाली नाकामी की कीमत पड़ रही चुकानी

गुजरात के एक निर्दलीय विधायक का एक नहीं बल्कि कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेना दिल्ली में बैठे आला अफसरों को खटक रहा था। अधीनस्थों को पूरी नजर रखने के निर्देश भी दिये थे। बावजूद इसके कार्यक्रम का प्रेसनोट लेकर उसी पर रिपोर्ट भेजने की परम्परा का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। सूत्रों का दावा है कि पहले भेजी गयी रिपोर्ट में तो मोदी-योगी विरोधियों के संग मंत्रणा तो दूर संग यात्रा तक का जिक्र नहीं था।

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