वाराणसी। सूबे की राजनीति में पिछले लोकसभा उपचुनाव के दौरान गठबंधन एक तरफ जहां सपा-बसपा को नजदीक ले आया वहीं भाजपा सरकार का एक निर्णय इनके नेताओं के बीच दूरियां खत्म करने में असरकारी साबित हो सकता है। दरअसल योगी सरकार ने मायाराज में बेची गई कौड़ियों के दाम 21 चीनी मिलों की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इस निर्णय से पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमों मायावती को तगड़ा झटका लगा है। लोकसभा चुनाव से पहले की गयी बदले की कार्रवाई का आरोप भले वह लगाये लेकिन कहा जा रहा है कि चीनी मिलों को बेचना मायावती के लिए गले की हड्डी साबित हो सकती है। इन 21 मिलें बेचे जाने और कथित तौर पर 1100 करोड़ के घोटाले की जांच के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर थी। खास यह कि जांच की आंच बड़े होटल कारोबारी तक भी पहुंच सकती है जो चीनी मिलों के सौदों को लेकर पहले से खासे परेशन हैं।

पहले से थे सपा-बसपा के एक सुर

सपा और बसपा कुछ माह पहले तक कट्टर प्रतिद्वंदी थे लेकिन इस मुद्दे पर दोनों के सुर एक ही थे। बसपा के शासन काल 2010-11 में 21 चीनी मिलें औने पौने दाम पर बेची गई थी। यह सौदा उस तर्ज पर किया गया था जो मुलायम सिंह यादव ने 2004-05 में 24 चीनी मिलों को लेकर किया था लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर डील रूक गयी थी। सूबे में सपा की सरकार बनी तो शिकायतें अखिलेश से की गयी लेकिन उन्होंने जांच कराने में रुचि नहीं ली। बताया जाता है कि अपनी पार्टी के एक पूर्व सांसद के खरीदारों में शामिल होने के चलते अखिलेश ने ऐसा किया था। हल्ला मचा तो उन्होंने जांच अपने लोकायुक्त एनके महरोत्रा को सौंप दिया जिन्होंने लगभग दो साल तक फाइल रखने के बाद घोटाला न होने की रिपोर्ट देते हुए केस क्लोज कर दि.ा।

10 से 15 करोड़ में बेच दिए गए थे चीनी मिल

गौरतलब है कि चीनी मिलों के बेचे जाने पर सच्चितानंद सच्चे ने हाईकोर्ट में इस मामले की याचिका दायर की थी। जिसपर सरकार ने घोटाले के जांच की सिफारिश की थी। बकौल सच्चितानंद ने कहा कि मायावती के राज में 21 चीनी मिलों को 10 से 15 करोड़ में बेच दिए गए। वहीं बाकी के बचे चीनी मिलों को अखिलेष सरकार ने बेची गई थी। गठबंधन से कुछ माह पहले बसपा से निकाले गये नसीमुद्दीन ने खुलासा किया था कि चीनी मिलों के सौदे में 11 सौ करोड़ का घोटाला हुआ था। यह बाद दीगर है कि सौदे पर उन्हीं के हस्ताक्षर है जिससे मायावती उन्हीं पर आरोप लगाने लगी।

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