वाराणसी। चौकाघाट की जिला जेल ही नहीं बल्कि पूर्वांचल की अधिकांश जेलों में मोबाइल का इस्तेमाल धडल्ले के साथ हो रहा है। इसकी जानकारी पुलिस को भी है लेकिन वह शातिर अपराधियों के आगे पूरी तरह से बेबस साबित हो रही है। जेल की हर बैरक में एक नहीं बल्कि कई मोबाइल पीसीओ की तर्ज पर इस्तेमाल हो रहे हैं। सर्विलांस पर इन्हें सुना भी गया लेकिन जो बातचीत थी वह पत्नी या प्रेमिका के अंडरगार्मेंट या साथ बिताये अंतरंग पलों की याद जेसी थी। पुलिसवाले अपना सिर उस समय पीट लेते हैं जब गाय या भैंस ने क्या बच्चा दिया यह पूछा जाता है। अपराध या अपराधी को लेकर कोई बात न होने के पीछे दूसरा ही खेल है।

हाइटेक हुए अपराधी, सिर्फ नेट कालिंग

माफिया गिरोहों से जुड़े अपराधी बदलते वक्त के साथ हाइटेक होते जदा रहे हैं। इन दिनों वह मोबाइल पर बात नहीं करते बल्कि अपने गुर्गो को इसे बात करने के लिए दे रखा है जिससे पुलिस को भ्रम में रखा जा सके। दरअसल अपराधी इन दिनों सिर्फ नेट कालिंग कर रहे हैं। व्हाट्सअप यै मैसेंजर से कालिंग अगंूठाटेक अपराधी कर रहा है। पुलिस के पास इसका तोड़ अभी नहीं है जिसका यह लाभ उठा रहे हैं।

शासन तक पहुंचा मामला

जेल का खेल पीएम से लेकर सीएम तक चुनाव के दौरान कह चुके हैं। भारी मात्रा में मोबाइल मिलने के बाद एक बार फिर से शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। सपा के शासनकाल में जेलों में जो जैमर लगे वह टू जी के लिए थे। कमीशनखोरी में इसे उस समय लगाया गया जब फोर जी का इस्तेमाल रिक्शावाला भी करने लगा था। यही कारण है कि जहां जैमर लगा है वहां के अफसर अपने आफिस में बैठ कर फोन इस्तेमाल करते हैं और शासन को इसी से रिपोर्ट भेजते हैं कि कोई फोन काम नहीं कर सकता है।

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