गाजीपुर। माफिया से माननीय बने एमएलसी बृजेश सिंह पिछले एक दशक से सलाखों के पीछे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज मामले एक के बाद एक कर खत्म हो रहे हैं। कुछ मामलों को लेकर सबकी निगाहें टिकी थी जिसमें भावरकोल थाना क्षेत्र की कुंडेसर चट्टी पर फायरिंग का मामला था। मंगलवार को एडीजे (द्वितीय) की अदालत ने बृजेश सिंह और उनके लेफ्टीनेंट कहे जाने वाले त्रिभुवन सिंह को इस मामले में साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इससे पहले भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ब्रजेश सिंह वाराणसी से गाजीपुर न्यायालय लाया गया। दोपहर बाद बृजेश समर्थक सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गये और एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला आरम्भ हो गया।

अफजाल अंसारी के चुनाव वाहन पर हुई फायरिंग

गौरतलब है कि 1991 विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी के वाहन पर दो मई की रात साढ़े नौ बजे कारसवार अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। उसमें तीन कार्यकतार्ओं की मौत हो गई थी जबकि कुछ जख्मी हो गये थे। अफजाल अंसारी मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक होने के बाद फिर से चुनाव मैदान में थे। मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराया गया था लेकिन विवेचना के दौरान बृजेश, त्रिभुवन, कालीदास, अनिल सिंह का नाम प्रकाश में आने पर पुलिस ने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।

अभियोजन का समर्थन नहीं किये गवाह

पुलिस ने इस मामले में जो चार्जशीट कोर्ट में प्रेषित की थी वह दो गवाहों के बयान के अधार पर थी। इन्होंने दावा किय कि इन लोगों मे फायरिंग की और उसी को आधार बना कर पुलिस ने आरोप पत्र तैयार कर दिया। मामले में सात गवाहों को परीक्षित कराया गया लेकिन पांच ने अभियोजन के कथन का समर्थन नहीं किया था।

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