वाराणसी। भाजपा के जमीनी नेता और पूर्व एमएलसी उदयनाथ सिंह उर्फ चुलबुल सिंह का रविवार की सुबह लंबी बीमारी के बाद महमूरगंज स्थित एक नर्सिंग होम में निधन हो गया। चुलबुल लंबे समय से बीमार थे और पिछले दिनों उन्हें दिल्ली के निजी अस्पताल के बाद यहा भर्ती कराया गया था। जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहने के दौरान चुलबुल सिंह स्थानीय निकाय से एमएलसी चुने गये और लगातार 12 साल तक भाजपा विधान परिषद सदस्य रहे। इनके बाद इस सीट पर परिवार का ही कब्जा रहा। इनके बाद भयो व बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह फिर उसके बाद खुद बृजेश सिंह भी एमएलसी बने। बड़े पुत्र सुशील सिंह चंदौली जिले की धानापुर और सकलडीहा सीट से दो बार और इन दिनों सैयदराजा सीट से भाजपा विधायक हैं। छोटे बेटे सुजीत सिंह उर्फ डाक्टर जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं और इन दिनों दिला पंचायत सदस्य हैं।

गांवों तक भाजपा की नींव मजबूत की

चुलबुल सिंह भाजपा के पहले ऐसे नेता थे जिनकी जड़े गांवों तक मजबूत थी। इससे पहले इसे शहरी पार्टी माना जाता था लेकिन राजनीति की सबसे निचली इकाई ग्राम सभा से उन्होंने पार्टी को मजबूत करना शुरू किया। कट्टर विरोधी भी चुलबुल सिंह को पंचायत राजनीति का चाणक्य मानते थे। पंचायत चुनाव की घोषणा होने के साथ उनका आशीर्वाद लेने की होड़ मच जाती थी। ग्राम प्रधानी हो या क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत सदस्य चुनाव में उनका दखल होता था। अपनी कुशल रणनीति के चलते वह जीत दिलाते थे। दूसरे जब तक सक्रिय होते चुलबुल सिंह के पास ब्लाक प्रमुख से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने के लिए पर्याप्त वोट रहते। कई बार विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने जीत हासिल की। अपने बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बड़ी बहू किरन सिंह को जीत दिलायी। इसके बाद सुजीत सिंह पिछले कार्यकाल में जिला पंचायत अध्यक्ष रहे जबकि छोटी बहू इंदू सिंह दूसरी बार ब्लाक प्रमुख चुनी गयी हंै।

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