लखनऊ। प्रदेश की जेलों में पहल ेभी हत्या की वारदाते हो चुकी है। लगभग एक दशक पहले इसी तरह मुन्ना बजरंगी के लेफ्टीनेंट कहे जाने वाले अन्नू त्रिपाठी को सेन्ट्रल जेल के भीतर गोलियों से छलनी कर दिया गया था। बावजूद इसके सुरक्षा पर ध्यान न देना वारदात का सबब बना। एडीजी जेल चंद्रप्रकाश ने स्पष्ट रूप से कबूल किया है कि वारदात जेल की सुरक्षा में बड़ी चूक है। सोमवार की सुबह लगभग 6 बजे मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या की गई। हत्या के बाद सुनील राठी और उसके गुर्गो ने वारदात में प्रयुक्त हथियार गटर में फेंक दिये जिसे बरामद करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

जेलर समेत चार सस्पेंड, मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश

योगी सरकार ने मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में फौरी कार्रवाई के तहत बागपत जेल के जेलर समेत चार को निलंंबित कर दिया है। सस्पेंड होने वालों में जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव , हेड वार्डेन अरजिंदर सिंह और वार्डन माधव कुमार शामिल हैं। इसके अलावा कई और के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गयी है। सीएम योगी ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश देने के साथ सख्त एक्शन के संकेत दिये हैं। बजरंगी के परिवार के संग उसके वकीलों ने भी वारदात में पुलिस-प्रशासन की संलिप्तता के आरोप लगाये हैं जिसे ध्यान में रखते हुए कार्रवाई का सिलसिला आरम्भ हुआ है।

विवाद के बाद चलायी गोली

जेल सूत्रों का कहना कि सुुबह 6 बजे जेल की बैरक में विवाद के बाद सुनील राठी ने बजरंगी को गोली मार दी थी। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जरायम जगत में सुनील राठी का नाम बजरंगी से कम नहीं है। पिता नरेश राठी की हत्या के बाद उसने अपराध जगत में कदम रखा तो पीछे मुड़ने का नाम नहीं लिया। पिता की हत्या के मामले में चार लोगों को मौत के घाट उतारने के बाद सभी सुनील के नाम से भी डरने लगे। पिछले विधानसभा चुनाव में उसकी मां वसपा के टिकट पर छपरौली से चुनाव भी लड़ चुकी हैं। सुनील राठी को भी पिछले दिनों रुड़की जेल से बागपत शिफ्ट किया गया था। सुनील ने भी बजरंगी की तरह रुड़की में अपनी जान का खतरा बताया था। कहा जाता है कि सुनील ही नहीं बल्कि उसका पूरा परिवार अपराध जगत में सक्रिय है।

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