मंत्री नीलकंठ ने दिखायी ‘दरियादिली’ तो पूर्वांचल के ‘एम्स’ तो कोरोना की जांच के लिए दो और मशीने मिली

वाराणसी। सिर्फ पूर्वांचल ही हीं बल्कि बिहार समेत समीपवर्ती कई प्रातों के रहन ेवाले बीएचयू अस्पताल सरीखी सुविधाएं आसपास के सैकड़ों किलोमीटर तक नहीं पाते। इन दिनों यहां पर समूचे विश्व में फैली महामारी कोरोना की जांच को लेकर खासी दिक्कत हो रही थी। भारी संख्या में सैंपुल जांच के लिए आने लगे थे जबकि जांच के लिए सिर्फ एक ही मशीन थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद पर्यटन और धर्माथ कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा. नीलकण्ठ तिवारी ने दरियादिली दिखायी है। अत्यंत आपदा की घड़ी में राज्यमंत्री ने अपनी विधायक निधि से 33 लाख रुपये की धनराशि बीएचयू के इंस्टीटूट आॅफ मेडिकल साइंस को नावेल कोरोना वायरस की टेस्टिंग मशीन के लिए जिला प्रशाशन के माध्यम से उपलब्ध कराई।

फौरन न दी जाती राशि तो न मिलती मशीन

गौरतलब है कि बीएचयू आईएमएस में करोना के टेस्टिंग के लिए केवल एक ही टेस्टिंग मशीन थी जिससे 20-30 जिलों के सैंपल चेक करना बहुत मुश्किल कार्य था। अब एक से बढ़कर वहां तीन मशीने हो जाएंगी। इन टेस्टिंग मशीन कोरोना संक्रमण की स्थिति की वजह से पूरी दुनिया और भारत मे बहुत मांग में है और इसकी बहुत सीमित सप्लाई है। यदि उसी दिन राज्यमंत्री धनराशि अवमुक्त नही कराते तो सम्भवत: बैंगलोर स्थित सप्लायर, मशीन किसी और को बेच देते और मशीन मिलनी भी संभव नहीं हो पाती। ये दोनों मशीनें बैंगलोर से चल चुकी हैं और जल्द ही आ जायेंगी।

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