वाराणसी। इंटरनेट के तेजी बढ़ते प्रचलन से जहां सहूलियत हो रही है तो जालसाजों ने इसे फर्जीवाड़े का जरिया बना लिया है। एटीएम कार्ड के जरिये धोखाधड़ी के बाद झारखंड़ के शातिरों ने नया पैंतरा अपनाया है। ठगों के गिरोह ने मेट्रोमोनियल साइट का फर्जी तरीके संचालन कर दर्जनों लोगों से लाखों रूपये ऐंठ लिये। खास यह कि समूचा गोरखधंधा उनके जरिये कर डाला जिन्हें कुछ हजार रुपये महीने वेतन पर रखा था। एसएसपी आरके भारद्वाज ने शुक्रवार को ऐसे ही शातिर गिरोह की गिरफ्तारी के बाद उनके कारनामों की फेरहिस्त बयां की तो सहसा विश्वास ही नहीं सका। कैंट पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम को इस कामयाबी के लिए पुरस्कृत करनेकी घोषणा की गयी है।
यूं होता था फर्जीवाड़ा
फर्जीवाड़े की शिकायत पर जांच में पता चला कि आन लाइन-मैच प्वाइंट, बेस्ट पार्टनर- मैट्ीमोनी डाट काम तथा हमसफर मैट्ीमोनी डाटकाम के नाम से आनलाइन शादी के प्रपोजल हेतु विज्ञापन जारी किये जाते थे। लोगोें को फोन करके बताया जाता था कि आप अपने लड़के अथवा लड़की जिसकी शादी होना है की सारी डिटेल के साथ हमारे वेवसाइट पर अपलोड कर दें। आपकी डिमांड के हिसाब से लड़का अथवा लड़की मिल जायेगी तो आपको फोन नम्बर एवं अन्य विवरण प्रदान किया जाएगा। आप लोग आपस में वार्ता कर शादी तय कर लेना। वेवसाइट पर डाटा अपलोड करने के नाम पर पांच हजार रुपए फीस के रूप में लिए जाते थे। जब किसी के द्वारा फीस इनके एकाउण्ट में भेज दिया जाता था तो इनके द्वारा अपने ही कर्मचारियों का नम्बर आवेदकों को प्रदान किया जाता था। कार्यालय में काल करने के नाम पर रखे गये वर्करों द्वारा जिस जाति का ग्राहक होता था उसको अपना नाम फर्जी तथा उसी की जाति का होना बताया जाता था जिससे ग्राहक को जल्दी विश्वास हो जाता था और ग्राहक द्वारा पैसा डाल दिया जाता तो उनको शादी के नाम पर फर्जी एडिट की गयी फोटो व मोबाइल नम्बर दिया जाता था। फोटो व नम्बर देने के बाद उनका फोन रिसीव नही किया जाता था एवं बार-बार फोन करने पर उनके साथ गाली गलौज भी किया जाता था।
कर्मचारियों को आगे कर पर्दे के पीछे से खेल
जालसाजों ने कबूल किया पुलिस कार्यवाही से बचने के लिए हम लोगों ने आफिस में कार्य करने वाले कर्मियों को भ्रमित कर उनसे उनकी मूल आईडी प्राप्त कर उन्ही के नाम से फर्म रजिस्टर्ड कराया तथा बैंकों में एकाउण्ट आदि खोले गये। खाता अपरेट खुद करते थे और बैंकों में लेनदेन के हिसाब से एसएमएस एलर्ट हेतु अपना मोबाइल प्रदान किया गया था ताकि हमको लेनदेन की जानकारी प्राप्त होती रहे। हम लोगों ने यह प्लान किया था कि इनके नाम से सारी चीजें रहेंगी तो हम पुलिस कार्यवाही से बच जायेंगे। जब शादी कराने के लिए लोगों का फोन आने लगा तथा पैसा जमा किया जाने लगा तो उक्त खाता का एटीएम हम लोगों द्वारा प्रयोग किया जाता रहा तथा चेक आदि से भुगतान हेतु कराने के लिए कर्मी जिनके नाम से एकाउण्ट था उनको भ्रमित कर चेक पर हस्ताक्षर कर लेते थे और जाकर बैंक में पैसा आहरित कर लेते थे। इस तरह की तीन-तीन फर्म वाराणसी और इलाहाबाद में विभिन्न नामों से संचालित है जिससे हम लोग जुडे हुए है जिसका कलेक्शन हम लोगों को मिलता रहता है। इसी तरह के 60 से 70 फर्म पूरे देश में संचालित है जो कि हमारी जानकारी में हैं।
झारखंड से चलता गिरोह
गिरफ्तार आरोपितों में हिमांशु पाठक मानगो जमशेदपुर (झारखण्ड),रामचन्द्र चौरसिया चक्रधरपुर पश्चिम सिंहभूमि (झारखण्ड) तथा टंकेश्वर प्रसाद सारागांव जांजगीर चापा (छत्तीसगढ) के निवासी हैं। इनके पास से 20 हजार नकदी के अलावा तीन लैपटाप, पांच मोबाइल और सीपीयू मिला है जिससे फजीवाड़े की पूरी कहानी खुलती है।

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