मायावती की बल्ले-बल्ले: परिणाम से हुआ स्पष्ट कि सपा से वोट लिया लेकिन शिफ्ट नहीं किया

लखनऊ। लोकसभा चुनावों में भाजपा की अभूतपूर्व जीत और उत्तर प्रदेश में दो तिहाई से अधिक सीटों को पाने के बावजूद इस चुनाव में किसी की राजनैतिक प्रभाव बढ़ा तो वह बसपा सुप्रीमो मायावती रही। मायावती ने चुनाव में जिस परिपक्वता का परिचय दिया उससे सभी का मानना है कि योजना के तहत उन्होंने जो चाहा वह पा लिया। सीटों के चयन से लेकर प्रचार की कमान अपने हाथोंमें रखते हुए मायावती अपने वोटरों को संदेश देने में सफल रही कि गठबंधन का लाभ किस तरह उठाया जा सकता है। इस बार के चुनाव में शून्य से सफर शुरू करने वाली मायावती खुद भले चुनाव नहीं लड़ी लेकिन 11 प्रत्याशियों को जीत दिलाने में सफल रही हैं।

सपा की तुलना में वोट अधिक मिले

गौरतलब है कि लोकसभा में बसपा की एक भी सीट नहीं थी और विधानसभा में भी संख्या महज 19 ही थी। इसकी तुलना में जहां के पास सात सांसद थे वहीं विधायक भी 49 थे। बावजूद इसके चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि बसपा को चुनाव में 19.3 प्रतिशत मत मिले जबकि सपा को इससे डेढ़ फीसदी कम। सपा को कुल 18 प्रतिशत भी मत नहीं मिल सके। परिणामों से स्पष्ट है कि सपा के वोट भले बसपा को शिफ्ट किये हों लेकिन उसी पार्टी को वोट दिये नहीं गये हैं। पश्चिम से लेकर पूरब में मायावती ने सधे अंदाज में अपने प्रत्याशियों को जीत दिलायी। जिन स्थानों से सटी सपा के प्रत्याशी लड़े वहां वोट उस तरह पड़े भी नहीं।

प्रदेश में भाजपा का इकलौता विकल्प

लोकसभा चुनावों के परिणाम बताते हैं कि मायावती अब यूपी में भाजपा के विकल्प के रूप में खुद को पेश करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस तो अपनी परम्परागत सीट तक नहीं बचा सकी है और सपा को घरेलू मोर्चे पर जूझना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि अब तो अखिलेश को गठबंधन में भी अजीत सिंह की रालोद की तरह जूनियर पार्टनर के रूप में मायावती के निर्देशों का पालन करना पड़ सकता है।

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