मऊ। दादरी के एखलाख मामले को लेकर सूबे में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सियासत गरमायी थी। काफी लोगों ने एवार्ड वापस किये थे। इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। शुक्रवार की रात अदरी में जमीयत उलमा की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस मामले की जिक्र करने के साथ गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर दी। उनका कहना था कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से इसका बेचना, खरीदना और काटना अपराध की श्रेणी में आ जाएगा। बावजूद इसके सरकार ऐसा नहीं करेगी। मौलाना का मानना है कि यदि सरकार ऐसा कर देगी तो उसकी सियासत की दुकान पर ताला लग जायेगा।

देश में माहौल बिगाड़ने की हो रही साजिश

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समाज के बीच भाईचारे के लिए अदरी में राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में मौलाना ने सियासत करने वालों पर तीखे प्रहार किये। मौलाना ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि चंद मुट्ठी भर लोग जनता को लड़ा कर देश में सांप्रदायिकता का माहौल बना रहे हैं। इस तरह के लोग सिर्फ धर्म के नाम पर लोगों को बांटते हैं। नुकसान किसी एक का नहीं बल्कि सबका होता है। जमीयत का इतिहास 150 साल पुराना है और देश को आजाद कराने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आजादी की लड़ाई में मुस्लिमों की कुर्बानियों पर कहा कि मुसलमानों को अपना इतिहास ही नहीं पता है। देश के आजाद होने से पहले हिंदू-मुस्लिम मिलकर रहते थे। इन दिनों तो धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा नहीं करेगी, क्योंकि सरकार ऐसा कर देगी तो उसकी सियासत की दुकान बंद हो जाएगी।

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