अजय कुमार सिंह

मऊ। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के विरोधी माने जाने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद सलीम अंसारी का बीएसपी से पत्ता साफ हो गया है। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में सलीम अंसारी को बाहर का रास्ता दिखा गया है। सलीम अंसारी के निष्कासन के साथ ही ये साफ हो गया कि मऊ में बीएसपी के अंदर अब सिर्फ अंसारी परिवार का ही सिक्का चलेगा। खासतौर से पार्टी में मुख्तार के बड़े बेटे अब्बास अंसारी को पार्टी अहम जिम्मेदारी दे सकती है। दरअसल चुनाव के दौरान जब अंसारी परिवार ने बीएसपी का दामन थामा था, तभी इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि देर सबेर सलीम अंसारी को पार्टी बाहर का रास्ता दिखाएगी।

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 मुख्तार परिवार के विरोधी रहे हैं सलीम

मऊ की सियासत को समझने वाले ये बखूबी जानते हैं कि मुख्तार और सलीम नदी के दो किनारे की तरह हैं। जिले की राजनीति में दोनों के बीच लंबे समय से प्रतिद्वंदिता चलती रही है। इस रेस में कभी मुख्तार बीस रहे तो कभी सलीम। साल 2010 का किस्सा सबको याद है। मायावती ने मुख्तार अंसारी को बीएसपी से बाहर किया तो उनके विरोधी सलीम अंसारी का रुतबा बढ़ाते हुए उन्हें राज्यसभा सांसद के पद से नवाजा। उस वक्त मायावती ने सलीम अंसारी को मऊ में मुख्तार के विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया, लेकिन सलीम बीएसपी सुप्रीमो की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए थे। जिले में पार्टी का ना तो जनाधार बढ़ा पाए और ना ही मुस्लिमों को अपने साथ जोड़ पाए। अलबत्ता इस बीच मुख्तार का जादू बढ़ता ही गया। इसी बीच विधानसभा चुनाव के ठीक पहले जब मायावती ने अंसारी परिवार को बीएसपी में शामिल किया तो ये साफ हो गया था कि सलीम अंसारी के दिन अब लद गए हैं।

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नसीमुद्दीन अंसारी के खास माने जाते हैं सलीम

बताया जाता है कि बीएसपी के अंदर सलीम को पार्टी के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दिकी का वरदहस्त माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के इस फैसले के बाद सलीम अंसारी लखनऊ में नसीमुद्दीन के घर के चक्कर लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि नसीमुद्दीन के कारण ही वह अब तक बीएसपी में टिके हुए थे। लेकिन चुनाव के बाद हालात तेजी से बदलने लगे हैं। हार की समीक्षा में जुटी मायावती ने अब पार्टी पर बोझ बन चुके नेताओं को किनारे लगाना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दूसरे जिलों में भी कुछ और बीएसपी के कद्दावर नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। मायावती के इस फैसले से साफ जाहिर हो गया है कि मऊ में पार्टी अब अंसारी परिवार के इर्द-गिर्द ही रहेगी। खासतौर से मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी का रोल अहम होना बताया जा रहा है।

 

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