मनोज सिन्हा की फोर्स और योगी की पुलिस आमने-सामने, जीआरपी थाने में रपट दर्ज

मऊ। केन्द्र और प्रदेश में भले एक ही पार्टी भाजपा की सरकार है लेकिन मामला खाकी के सम्मान का आया तो दोनों आमने-सामने हो गये हैं। पिछले दिनों ट्रेन से कूद कर फरार हो रहे बंदी का पीछा कर रहे सिपाही की पिटाई के मामले में एसपी मऊ अभिषेक यादव ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने समूचे मामले की रिपोर्ट शासन को प्रेषित करने के साथ जीआरपी थाने में दोषी आरपीएफकर्मियों के खिलाफ मुकदमा कायम कराया है। कांस्टेबिल रामचंद्र पासवान की तहरीर पर आरपीएफ के तीन जवानों के खिलाफ आईपीसी की धारा 332,504 व 506 के अलावा एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा कायम कर जीआरपी ने विवेचना शुरू कर दी है। शुक्रवार की देर शाम मुकदमा कायम होने के साथ आरपीएफ और प्रदेश पुलिस में खुल कर ठन गयी है।
वीडियो फुटेज से सामने आयी थी सच्चाई
अमूमन किसी बंदीके फरार होने पर पुलिसकर्मियों को दोषी मान लिया जाता है लेकिन यह ऐसा मामला था जिसमें वीडियो फुटेज से पूरी सच्चाई सामने आयी। अमृत प्रभात डाट काम का वीडियो फुटेज में स्पष्ट है कि किस तरह बंदी का पीछा कर रहे कांस्टेबिल को आरपीएफ के जवान जबरन ट्रेन के कोच में खींच ले गये। कांस्टेबिल की बेहरमी के साथ पिटाई की जा रही थी और वह लगातार गुहार लगा रहा था कि वह भाग रहे बंदी का पीछा कर रहा है। आरपीएफ के जवानों के साथ कुछ और लोगों ने कांस्पेबिल पर हाथ साफ किया था। संयोग था कि ट्रेन में पुलिस के कुछ और कर्मी सफर कर रहे थे जिन्होंने हस्तक्षेप किया तो कांस्टेबिल को मुक्ति मिल सकी। वीडियो फुटेज देखने के बाद एसपी मऊ ने मुकदमा कायम कराने के आदेश के संग शासन को पत्र भेजा।
कुछ घंटो तक ही रह सकी फरारी
वाराणसी की कोर्ट में पेशी के बाद मऊ जिला जेल ले जाये जा रहे संगीन मामलों के आरोपित रवीन्द्र उर्फ राजू ने बुधवार की देर शाम माहपुर स्टेशन के पास कृषक एक्सप्रेस से कूद कर फरार होने के प्रयास किया था। आरपीएफ और पुलिस के बीच भिडंत के चलते राजू फरार तो हो गया लेकिन कुछ घंटों के भीतर दोबारा पकड़ लिया गया। दरअसल ट्रेन से कूदने में राजू का पांव टूट गया था और सिर में चोटें आयी थी। भोर में गांववालों ने झाडी में छिपे राजू को देख पुलिस को सूचना दी जिसके बाद फोर्स ने गिरफ्तार कर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

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