देश भर के लोगों की जिस मॉडल पर श्रद्धा वैसा ही बनना चाहिये प्रभु राम का मंदिर, स्वामी वासुदेवानंद ने ‘इशारों’ में कही बड़ी बात

वाराणसी। दशकों पहले विश्व हिंदू परिषद ने श्रीराम मंदिर का एक मॉडल तैयार कर समूचे देश में लोगों के सामने पेश किया था। करोडों लोगों ने इस पर विश्वास कर सवा-सवा रुपये की आर्थिक मदद की थी। इससे मिले 8.25 करोड़ रुपये से अयोध्या में प्रस्तावित श्रीराम मंदिर के निर्माण की तैयारी चल रही है। यह मॉडल भारतीय परंपरा, शिल्प और वास्तु का प्रतीक है। इसी के आधार पर प्रभु श्रीराम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। गुरुवार दोपहर गंगा महासभा के महमूरगंज स्थित कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने इशारों में कई तंज कसे। काशी में मंदिर को लेकर किये जा रहे धन संग्रह से लेकर शंकराचार्य विवाद पर तीखी टिप्पणी भी की।

सरकारी ट्रस्ट और निजी में होता फर्क

स्वामी वासुदेवानंद का कहना था कि हम चाहेंगे कि भगवान का मंदिर अतिशीघ्र बन जाए, आगे जो होगा वह प्रभु श्रीराम जी की मर्जी। श्रीराम मंदिर निर्माण को गठित न्यास को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। कहा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार ने यह ट्रस्ट बनाया है और उसी के मुताबिक काम भी हो रहा है। दूूसरी तरफ रामालय ट्रस्ट पूरी तरह व्यक्तिगत ट्रस्ट है। सूबे के पूर्व सीएम कल्याण सिंह और पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती के ट्रस्ट में पिछड़ी जाति को शामिल करने के जवाब में कहा कि देश की आबादी 130 करोड़ है। ऐसे में सभी की मांगों को मानना असंभव है। सभी ट्रस्ट में शामिल होने के बदलेअपना सहयोग दें।

मलवा तो दशकों पहले खत्म हो चुका

कुछ मुस्लिम संगठनों की तरफ से श्रीराम जन्मभूमि का मलबा मांगे जाने पर उनका कहना था कि वहां प्राचीन मंदिर था। सन् 1992 में ही मलबा खत्म हो गया। मुस्लिम पक्षकार अब जाकर उसकी तलाश् कर रहे हैं। ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद को लेकर विवाद पर साफ शब्दों में कहा कोर्ट ने जो दूसरे लोग गए उन्हें भी शंकराचार्य नहीं माना है। समूचा फैसला इंटरनेट पर उपलब्ध है। गंगा की साफ पर स्वीकार किया कि जितनी स्वच्छ होनी चाहिए उतनी नहीं हुई। यह बात दीगर है कि प्रयास चल रहा है। सरकार पूरा प्रयास कर रही है लेकिन पहले से जो गतिविधियां चल रही हैं जब तक उनमें बदलाव नहीं होगा तब तक पूरा प्रयास सार्थक नहीं होगा। इसके लिए सभी को मिल कर कोशिशें करनी चाहिये।

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