वाराणसी। हमारे घरों की दीवार या गेट पर कभी-कभार कुछ अनूठे निशान मौजूद होते हैं जिसे किसी सिरफिरे की हरकत समझ कर नदरंंदाज कर दिया जाता है। वास्तव में यह शातिर अपराधियों के गिरोह का निशाना होता है जिसमें कोड भाषा में संदेश रहता है। लोगों को इससे सावधान करने की खातिर एसपी मीरजापुर आशीष तिवारी ने अनूठी पहल की है। ‘डा पिंची कोड’ जनजागरूकता के लिए बनी लघु फिल्म है जिसमें चोरों के इस्तेमाल किये जाने वाले निशान के बारे में कई रोचक जानकारी है।

102

रेकी के दौरान लगाते हैं निशान

अक्सर बहुत सारे अनजान लोग हमारे इर्द गिर्द, कालोनियों में तथा हमारे घरों में आते जाते रहते हैं। इनमें भींख मांगने वाले, साड़ी बेचने वाले, ज्वेलरी बेचने वाले, फ्री ब्लड टेस्ट के बहाने, कोई मंदिर केलिए चंदा मांगने के बहाने या कभी कोई मदद मांगने जैसे बात रूम यूज करना है का बहाना बनाते हैं। कुछ लोग कभी बेमतलब अपने घरों के आसपास घूम फिर कर चले भी जाते हैं। इनमें से कुछ लोगों का काम होता है, हर घर के रहन सहन, घर के लोगों के आने जाने के समय एवं धन दौलत आदि के बारे में जानकारी लेना। इसके बाद यह लोग घर के बाहरी दीवारों के किसी भी कोने में चाक या किसी अन्य चीज द्वारा एक कोड यानि निशान छोड़ जाता है। चोरों के इन निशानों को डा पिंची कोड कहते है। यह किसी मार्केटिंग कंपनी के प्री-सर्वे से कम नहीं होती। इस कोड के जरिये चोरों के गैंग को उस घर की जीवन शैली का पता चल जाता है और चोरी करने में आसान हो जाती हैं।

101

admin

No Comments

Leave a Comment