बुद्ध का जीवन ही संदेश :राममोहन पाठक

वाराणसी। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के कुलपति राममोहन पाठक ने कहा कि भगवान बुद्ध का जीवन ही संदेश है। उन्होंने मानव के समग्र विकास व सुख के लिए ढाई हजार साल पहले ही मानदंड तैयार कर दिया था। इसका  संवाहक पालि भाषा थी। ये बातें उन्होंने रविवार को महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से बोधि वृक्ष परिसर में आयोजित भारत की सांस्कृतिक धरोहरों के विकास में पालि भाषा की भूमिका विषयक संगोष्टी में कही। 


उन्होंने कहा कि पाली, मागधी, मागधी स्मृति भाषाओं में उन्होंने अपने सिद्धांतों, संदेशों व जीवन के उपक्रमों का संचार किया। पाली भाषा का बौद्ध संस्कृति के संदर्भ में निरंतर अध्ययन व नई प्रासंगिकता का विवेचना करते हुए भाषा को उपयोगी व जीवंत बनाये रखना आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि नव नालंदा विहार के प्रो. उमा शंकर ब्यास ने कहा कि पालि भाषा भगवान बुद्ध की भाषा है, इसे व्यवहारिक जीवन में लाने की जरूरत है। अध्यक्षता करते हुए नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. वैधनाथ लाभ ने कहा कि पालि हिंदी शब्दकोश एवं पाली त्रिपिटक साहित्य का हिंदी में अनुवाद किया गया है। इसका अन्य भाषाओं में भी अनुवाद होना चाहिए। अतिथियों का स्वागत मूलगंध कुटी विहार के विहाराधिपति के मेधांकर थेरो ने किया। संचालन अनिमेष प्रकाश व धन्यवाद ज्ञापन प्रो.विमलेंद्र कुमार ने किया। इस मौके पर डॉ. प्रियसेन सिंह, डॉ. शुभ्रा वर्मा, प्रो. अंगराज चौधरी, प्रो.प्रीति कुमारी दुबे सहित आदि उपस्थित थे।

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