भदोही। गोपीगंज थाने में संदिग्ध हालात में आटो ड्राइवर रामजी मिश्र (65) की मौत के मामले में ज्ञानपुर के बिधायक विजय मिश्र ने अनुकरणीय पहल की है। घटना के बाद शासन-प्रशासन की तरफ से अभी तक एक रुपये की आर्थिक मदद पीड़ित परिवार को नहीं मिली थी और राजनेता के रूप भाजपा विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी और दीनानाथ भाष्कर पीड़ित परिवार से मिल कर लौट आये थे। दूसरी तरफ ज्ञानपुर के विधायक विजय मिश्र खुद और अपने सहयोगियों से 6.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। विधायक ने जहां तीनों बेटियों को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गयी है। वहीं इकलौते बेटे को एक लाख और पीड़ित पत्नी को 50 हजार की आर्थिक मदद उपलब्ध करायी है। विधायक ने बच्चों की शिक्षा, बेटे को नौकरी और दोनों बेटियों की शादी की जिम्मेदारी लेने के साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। भतीजे ज्ञानपुर ब्लाक प्रमुख मनीष मिश्र और डीघ प्रमुख नीता स्वर्णकार की तरफ से भी एक-एक लाख रुपये की मदद की गयी हैं। गोपीगंज नगर अध्यक्ष प्रहलाददास गुप्त और निर्यातक श्रीराम मौर्या की तरफ से 50-50 हजार की पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी गयी है। जबकि ब्राहमण युवजसभा भदोही जिलाध्यक्ष अंबरीश तिवारी की तरफ से 5100 रुपये की आर्थिक मदद दी गयी है।

पुत्री ने उठायी सीबीआई जांच की मांग

पुलिस की कथित पिटाई से मृत रामजी की बेटी दीपाली का आरोप है कि उसे जिला और पुलिस प्रशासन की जांच पर भरोसा नहीं है। मेरे पिता रामजी मिश्र के मौत की जांच सीबीआई से करायी जाय। उसने आशंका जताया है कि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बदल सकती है। दीपाली ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस घटना को रफा-दफा करने का दबाब बना रही है। घटना के बाद पुलिस पिता के अंतिम संस्कार को लेकर काफी सक्रिय दिखी थी। परिवार इतनी जल्द अंतिम संस्कार नहीं करना चाहता था लेकिन पुलिस ने आनन-फानन में अंतिम संस्कार करा दिया। दीपाली का आरोप है कि पुलिस को आशंका थी कहीं शव को लेकर परिवार दूसरा हंगाम न खड़ा कर दे। हमारे परिवार को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को सजा होनी चाहिए।

दूसरे दिन भी थाने पर विरोध प्रदर्शन

थाना परिसर में हुई रामजी मिश्र के मौत का मामला पुलिस के गले की फांस बनता जा रहा है। रविवार को राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा के जिलाध्यक्ष अम्बरीश राधेश्याम तिवारी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में जुटे ब्राह्मण युवजन सभा के पदाधिकारी और कार्यकतार्ओं ने गोपीगंज थाने का घेराव किया और पुलिस प्रशासन विरोधी नारे लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है। युवजनसभा ने गोपीगंज चौकी इंचार्ज का निलंबन किए जाने के बाद मृतक के एक पुत्र को सरकारी नौकरी और 20 लाख रुपए की आर्थिक मदद दिलाने की मांग किया। इसके बाद कोतवाल के निलंबन की मांग उठाई। साथ ही पूछा कि पुलिस ने मामूली विवाद में मृतक को आखिर लाकअप में क्यों डाला। उन्होंने रामजी की मौत के लिए पुलिस को जिम्मेदार बताया है।

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